इंदौर में दूषित जल से मौतों पर सियासी घमासान, दिग्विजय सिंह ने उठाई न्यायिक जांच की मांग

खबर सार :-
इंदौर में दूषित जल से हुई मौतों ने स्वच्छता और विकास के दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। दिग्विजय सिंह की न्यायिक जांच की मांग ने मामले को और तूल दे दिया है। केवल मुआवजा और तबादले समाधान नहीं हैं। जब तक जिम्मेदारी तय कर दोषियों को सजा नहीं दी जाती, तब तक जनता का भरोसा बहाल होना मुश्किल है।

इंदौर में दूषित जल से मौतों पर सियासी घमासान, दिग्विजय सिंह ने उठाई न्यायिक जांच की मांग
खबर विस्तार : -

Judicial Inquiry: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से नवाजे गए इंदौर में दूषित पेयजल की वजह से हुई मौतों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार पड़े हैं। इस गंभीर घटना के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

दिग्विजय सिंह का सरकार पर सीधा हमला

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इंदौर उनका बचपन का शहर है, राज्य की आर्थिक राजधानी है और देशभर में स्वच्छता का मॉडल माना जाता है, लेकिन उसी शहर में दूषित पानी से लोगों की जान चली जाना बेहद शर्मनाक है।

जिम्मेदारी तय करने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब तक मौतों का आंकड़ा दो-चार तक सीमित था, तब तक किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। जैसे-जैसे मौतों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का खेल शुरू हो गया। मंत्री अफसरों पर, अफसर मेयर पर और मेयर व्यवस्था पर दोष मढ़ते नजर आए। इस बीच असली मुद्दा – लोगों की जान – पीछे छूट गया।

मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री पर सवाल

दिग्विजय सिंह ने इंदौर के प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हर दूसरे दिन इंदौर आते हैं, लेकिन इस त्रासदी के बाद केवल मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? कुछ अधिकारियों के ट्रांसफर और मुआवजे से शहर पर लगे कलंक को नहीं धोया जा सकता।

हाईकोर्ट जज से जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की कि इस पूरे मामले की हाईकोर्ट के सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराई जाए और सार्वजनिक सुनवाई हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि मुआवजे से जिंदगी वापस नहीं आती। जरूरत है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकार का आश्वासन, राजनीति तेज

घटना के बाद राज्य के अन्य हिस्सों से भी दूषित पानी की आपूर्ति के मामले सामने आने लगे हैं। सरकार दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है, लेकिन विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता बता रहा है। यह मामला अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।

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