लखनऊ : निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों ने सोमवार को विद्युत नियामक आयोग ऑफिस के सामने मूक प्रदर्शन किया और ज्ञापन भी सौंपा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में बिजली कर्मी नियामक आयोग कार्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे। बिजली कर्मियों ने आयोग के मुख्य द्वार के सामने निजीकरण के विरोध में तख्तियां लेकर मूक प्रदर्शन किया। ज्ञापन के माध्यम से संघर्ष समिति ने निजीकरण पर नियामक आयोग द्वारा सुनवाई पर अपनी आपत्ति व विरोध दर्ज कराया।
समिति ने ज्ञापन के जरिए नियामक आयोग से यूपीपीसीएल प्रबंधन द्वारा पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के लिए दिए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट को नामंजूर करने और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही आयोग के समक्ष निजीकरण के मामले में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को अपना पक्ष रखने के लिए समय देने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नियामक आयोग को अवैध तरीके से नियुक्त, झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाड़ा स्वीकार कर लेने वाले ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा बनाए गए पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर यूपीपीसीएल से कोई बात नहीं करनी चाहिए थी और न ही इस पर कोई अभिमत देना चाहिए। नियामक आयोग में आज की तारीख में कोई मेंबर लॉ नहीं है।
इस प्रकार से आयोग का तकनीकी दृष्टि से कोरम ही पूरा नहीं है। यूपीपीसीएल प्रबंधन द्वारा नियामक आयोग में निजीकरण का दस्तावेज प्रस्तुत करने के समाचार से प्रदेश भर के बिजली कर्मियों में आक्रोश है। इसके विरोध में सोमवार को सभी जनपदों, परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
संघर्ष समिति ने कहा कि, वर्तमान में नियामक आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार के यूपीपीसीएल के चेयरमैन रहते 06 अक्टूबर 2020 को प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते पर अरविंद कुमार के हस्ताक्षर हैं, जिसमें पूर्वांचल डिस्कॉम के निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की बात लिखी है।
यह भी लिखा है कि प्रदेश के किसी अन्य जगह पर कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसे में वह कैसे दोनों डिस्कॉम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर अपना अभिमत दे सकते हैं। इसके अलावा नियामक आयोग में दूसरे सदस्य संजय सिंह यूपीपीसीएल के कर्मचारी रह चुके हैं। वह भी अपना अभिमत नहीं दे सकते हैं।
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