लखनऊ: बीते माह गोमतीनगर रेलवे स्टेशन रोड विकेक खंड-2 की सड़क को विद्युत विभाग द्वारा खोदा गया था। भूमिगत लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़क अब तक नहीं बन सकी है। सड़क खोदाई अथवा निर्माण कार्य के दौरान वायु प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने नियम बना रखा है। हालांकि, सरकारी विभाग पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की धज्ज्यिां उड़ाने में विद्युत विभाग काफी आगे दिख रहा है।
अंडरग्राउंड केबल डालने के लिए सड़क खोदने के दौरान विद्युत विभाग नियमों के पालन के प्रति लापरवाह बना रहा। सड़क खोदाई के दौरान निकली मिट्टी पर न तो पानी का छिड़काव कराया गया और न ही धूल उड़ने से रोकने के लिए कोई अन्य प्रयास किए गए। अब भूमिगत केबल डालने के करीब एक महीने बाद भी सड़क न बनाए जाने से प्रदूषण के प्रति लापरवाही व अनदेखी जारी है। गौरतलब है कि लेसा के गोमतीनगर जोन में गोमतीनगर स्टेशन रोड पर भूमिगत केबल डालने के लिए बीते करीब एक माह पूर्व सड़क खोदी गई थी। सड़क खोदने के दौरान ठेकेदार द्वारा वायु प्रदूषण से बचाव को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया था।
सड़क खोदाई के दौरान निकली मिट्टी का ढ़ेर जगह-जगह फैला हुआ था। करीब आधी सड़क धूल-धूसरित हो गई थी। रोड पर सुबह से लेकर देर रात तक ट्रैफिक होने से तेज रफ्तार में चार पहिया वाहनों के निकलने से धूल के गुबार हवा में उड़ रहे थे। इससे राहगीरों के साथ ही आस-पास के घरों में धूल की परत जम गई थी। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। पीडब्ल्यूडी के इलाकाई सुपरवाइजर अजय त्रिपाठी ने बताया कि बिजली विभाग का भूमिगत केबल डालने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते अभी सड़क बनाने का टेंडर नहीं हुआ है। खोदी गई सड़क का मलबा और मिट्टी इधर-उधर फैली हुई है। इससे कोई दुर्घटना न हो जाए अथवा कोई राहगीर चोटिल न हो जाए, इसको देखते हुए मलबा और मिट्टी को व्यवस्थित कराया जा रहा है। बिजली विभाग के केबल जुड़ते ही सड़क बनाने का काम भी जल्द पूरा करा दिया जाएगा।
भूमिगत केबल डालने के लिए लेसा के ठेकेदार द्वारा खोदी गई सड़क करीब महीने भर बाद भी नहीं बन सकी है। जानकारों की मानें तो सड़क खोदाई करने से पूर्व जिस विभाग की सड़क होती है, उससे परमीशन लेनी होती है। सड़क खोदाई के बजट के साथ ही इसको बनाने का पैसा भी पास होता है। पीडब्ल्यूडी से रोड कटिंग की एनओसी लेनी होती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर पीडब्ल्यूडी से एनओसी ली गई तो सड़क बनाने में देरी क्यों की जा रही है। या बगैर पीडब्ल्यूडी की अनुमति के ही सड़क खोद दी गई और इसको बनाने का बजट भी मिलीभगत से हजम कर लिया गया।
राजधानी लखनऊ में वायु प्रदूषण कम करने के सिर्फ कागजी प्रयास किए जा रहे हैं। जिम्मेदार सरकारी विभागों का रवैया गैरजिम्मेदाराना है। सीएम योगी ने जनवरी 2026 से यूपी में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए परियोजना शुरू करने का ऐलान किया है। हालांकि, सीएम योगी के वायु प्रदूषण कम करने के इस भगीरथ प्रयास पर जिम्मेदार सरकारी विभागों की लापरवाह, गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली कहीं भारी न पड़ जाए, यह बड़ा सवाल है।
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