मीरजापुर: जिले में गंगा नदी और अन्य नदियों से होने वाली संभावित बाढ़ के मद्देनजर जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में जनप्रतिनिधिगण, सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्य उद्देश्य था संभावित बाढ़ से निपटने और नदी तटबंधों के कटान को रोकने के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करना। बैठक में विधायक नगर रत्नाकर मिश्र, विधायक मड़िहान रमाशंकर सिंह पटेल, विधायक मझवां शुचिस्मिता मौर्या, विधायक छानबे रिंकी कोल तथा सांसद/केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के प्रतिनिधि अवध नरेश ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग के अभियंता और आपदा विशेषज्ञ अंकुर गुप्ता भी बैठक में मौजूद थे।
विधायक नगर रत्नाकर मिश्र और विधायक मझवां शुचिस्मिता मौर्या ने अपने-अपने क्षेत्रों में गंगा नदी के कटान और बाढ़ से होने वाली समस्याओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने नदियों के किनारे स्थित गांवों और मोहल्लों में कटान को रोकने के लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। इन क्षेत्रों में भोगांव, कंतित, मझवां और भटौली पुल के आस-पास स्थित गांव विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। अधिशासी अभियंता सिंचाई हरिशंकर सिंह ने बताया कि गंगा नदी के किनारे कुल आठ स्थानों पर कटान रोकने के लिए प्रस्ताव भेजे गए थे, जिनमें से तीन स्थानों की स्वीकृति शासन से प्राप्त हो चुकी है। जिलाधिकारी ने इस पर और विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इन कटान स्थलों के पुनः चिन्हांकन के साथ-साथ एक कार्य योजना तैयार की जाए, ताकि इन स्थानों की मरम्मत के लिए जल्द ही स्वीकृति प्राप्त की जा सके।
जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने कहा कि कार्य योजना में नदियों, नहरों और तटबंधों की मरम्मत के अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालन, पशुओं के टीकाकरण, खाद्य सामग्री, शुद्ध पेयजल, रैन बसेरों और अन्य राहत कार्यों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी विभाग अपनी तैयारियों को शीघ्र पूर्ण करें ताकि वर्षा के मौसम से पहले सभी कार्यों को समय से पूरा किया जा सके। जिलाधिकारी ने बैठक के अंत में अधिकारियों से यह भी कहा कि दो दिनों के भीतर सभी विभागों से एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की जाए, जिसे शासन के पास भेजकर आवश्यक धनराशि स्वीकृत कराई जा सके। यह बैठक मीरजापुर में बाढ़ से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिससे भविष्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक मजबूत और प्रभावी राहत व्यवस्था तैयार हो सकेगी।
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