बुंदेलखंड में कड़ाके की सर्दी एवं घना कोहरा,,सांस एवं फेफड़ों की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी

खबर सार :-
बुंदेलखंड में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का असर बढ़ा। झांसी में तापमान गिरने से ब्रोंकाइटिस और सांस संबंधी मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

बुंदेलखंड में कड़ाके की सर्दी एवं घना कोहरा,,सांस एवं फेफड़ों की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी
खबर विस्तार : -

Jhansi News : बुंदेलखंड अंचल में इन दिनों ठंड ने अपना तीखा तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। कड़ाके की सर्दी के साथ-साथ घने कोहरे ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। सोमवार को झांसी में अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले 24 घंटों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में संभावित बारिश का असर झांसी और आसपास के इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। इसके चलते तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।

क्षेत्रीय मौसम इकाई ने बुंदेलखंड के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए घने कोहरे की चेतावनी दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मंगलवार की रात से कोहरा और अधिक सघन हो सकता है, जिससे दृश्यता कम होने के साथ यातायात और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा। मौसम विशेषज्ञ डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि पूर्वी क्षेत्र में हो रही मौसमीय गतिविधियों के कारण झांसी में शीत लहर और कोहरे की स्थिति बन रही है, जिससे ठंड का प्रभाव और बढ़ेगा। तेजी से बढ़ती ठंड को देखते हुए नगर निगम ने आमजन और जरूरतमंदों के लिए राहत के इंतजाम शुरू कर दिए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं। एलिट चौराहा, सीपरी बाजार, बस स्टैंड और मेडिकल कॉलेज क्षेत्र समेत कई स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, ताकि राहगीरों, मजदूरों और गरीब तबके को ठंड से कुछ राहत मिल सके।

मौसम में आई इस अचानक ठंडक का सीधा असर स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार ठंड बढ़ने के साथ ब्रोंकाइटिस, खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी के मामले करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. डी. एस. गुप्ता ने बताया कि सर्दियों में ब्रोंकाइटिस का खतरा अधिक रहता है। संक्रमण की स्थिति में फेफड़ों में सूजन आ जाती है, जिससे सूखी या बलगम वाली खांसी, गले में दर्द और सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। कई मामलों में जुकाम, हल्का बुखार, शरीर में दर्द और ठंड लगने की शिकायत भी सामने आती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि खांसी तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, बलगम में खून आए, सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो या तेज बुखार हो, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति में भी बदल सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। नियमित रूप से हाथ धोना, धूम्रपान से दूरी बनाए रखना, गर्म पानी, हर्बल चाय या सूप का सेवन करना और पर्याप्त आराम करना बेहद जरूरी बताया गया है। घरों में हवा में नमी बनाए रखना भी फायदेमंद हो सकता है। खांसी या बलगम की समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से उपचार कराने की अपील की गई है। कुल मिलाकर, बुंदेलखंड में बढ़ती सर्दी और घने कोहरे ने जहां लोगों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है, वहीं स्वास्थ्य विभाग और नगर प्रशासन भी हालात से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में ठंड के और बढ़ने की आशंका के चलते सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है।

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