विधानसभा में गरजा शाहपुरा का सवाल, डॉ. लालाराम बैरवा ने पूर्व सरकार पर बोला हमला

खबर सार :-
शाहपुरा का मुद्दा विधानसभा में गूंजा। डॉ. लालाराम बैरवा ने पिछली सरकार पर तीखा हमला करते हुए उस पर झूठे वादे करके जनता को लड़ाने का आरोप लगाया। शाहपुरा को फिर से जिला बनाने की पुरजोर मांग उठाई गई।

विधानसभा में गरजा शाहपुरा का सवाल, डॉ. लालाराम बैरवा ने पूर्व सरकार पर बोला हमला
खबर विस्तार : -

शाहपुराः राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को शाहपुरा को पुनः जिला बनाए जाने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। शाहपुरा से विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने सदन में पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जिलों की घोषणाएं की गईं, लेकिन धरातल पर ठोस कार्य नहीं हुए। उन्होंने कहा कि “झूठी घोषणाओं के सहारे वाहवाही लूटने की कोशिश की गई, मगर जनता ने सच्चाई समझ ली और परिणाम सबके सामने है।”

पिछली सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

विधायक बैरवा ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने जिला पुनर्गठन को राजनीतिक हथियार बनाकर लोगों को आपस में बांटने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और दीर्घकालिक योजना का अभाव रहा, जिससे कई क्षेत्रों में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी।

शाहपुरा का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए डॉ. बैरवा ने सरकार से स्पष्ट मांग की कि शाहपुरा को पुनः जिला बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आवश्यक प्रशासनिक ढांचे, संसाधनों, कार्यालयों और अधिकारियों की नियुक्ति के साथ योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं, रोजगार के अवसर और आधारभूत संरचना का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।

स्थानीय लोगों को सरकार से आस

उन्होंने तर्क दिया कि शाहपुरा ऐतिहासिक, भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से जिला बनने की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह क्षेत्र लंबे समय से जिला बनाए जाने की मांग करता आ रहा है और यहां की जनता को अब ठोस निर्णय की अपेक्षा है। “अब और टालमटोल नहीं चलेगी, सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना होगा,” उनके इस बयान से सदन में सियासी हलचल देखी गई।

विधानसभा में इस मुद्दे के उठने से शाहपुरा क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि शाहपुरा को पुनः जिला बनाने के संबंध में कब और किस प्रकार का निर्णय लिया जाता है।

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