बयाना विधायक ने अत्यंत पिछड़े समाज का रखा पक्ष, उठाई मांगे

खबर सार :-
विधायक ने कहा कि राज्य सरकार को इन अत्यंत पिछड़े समाजों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा गरीबी के कारण बच्चों को नहीं पढ़ा पाते हैं। समुदाय के लोगों की प्रशासनिक भागीदारी भी लगभग शून्य के बराबर है। वर्ष 2005 से इन समुदायों के लोग लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

बयाना विधायक ने अत्यंत पिछड़े समाज का रखा पक्ष, उठाई मांगे
खबर विस्तार : -

भरतपुरः बयाना विधायक डॉ. ऋतु बनावत ने आज राजस्थान विधानसभा में प्रक्रिया 295 के तहत कुशवाहा, काछी, शाक्य, माली तथा अन्य अत्यंत पिछड़े समाज की समस्याओं और मांगों को मजबूती से उठाया। उन्होंने अध्यक्ष महोदय के माध्यम से राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राजस्थान के कुशवाहा, काछी, शाक्य एवं माली समाज सामाजिक और आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े वर्ग में आते हैं।

उन्होंने बताया कि इन समुदायों की आजीविका मुख्य रूप से बटाईदार खेती, पशुपालन, खदानों में श्रम कार्य और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है। अधिकांश परिवार कच्चे घरों और झोपड़ियों में जीवन यापन करते हैं। आर्थिक अभाव के कारण वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में असमर्थ हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक और सरकारी सेवाओं में उनकी भागीदारी लगभग शून्य है।

डॉ. बनावत ने कहा कि वर्ष 2005 से ये समुदाय अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। राजस्थान सरकार की इसरानी कमेटी (2012), एस.आर. वर्मा कमेटी, चौधरी उदयकांत आयोग तथा मंडल आयोग की सिफारिशों में भी इन समाजों को अत्यंत पिछड़ा माना गया है। इसरानी कमेटी द्वारा ओबीसी की 44 अत्यंत पिछड़ी जातियों में से छंटनी के बाद 18 जातियों की सूची में काछी (कुशवाहा) समाज को शामिल किया गया था।

उन्होंने मांग रखी कि एस.आर. वर्मा कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए। सामाजिक उत्थान के लिए लवकुश बोर्ड को वित्तीय बोर्ड का दर्जा देकर उसमें 7 सदस्यों की राजनीतिक नियुक्ति की जाए तथा नए बजट में पर्याप्त राशि आवंटित की जाए। साथ ही बागवानी विकास बोर्ड का गठन किया जाए।

उन्होंने प्रदेश में आवासीय लवकुश विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित करने, प्रत्येक जिले में लवकुश वाटिका बनाने, समाज के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर विद्यालयों का नामकरण करने तथा जून 2022 आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की। इसके अतिरिक्त महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न से सम्मानित करने की भी मांग रखी गई।

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