अयोध्याः चल-अचल संपत्ति विवरण को लेकर जारी हालिया शासनादेश ने परिषदीय शिक्षकों के बीच जो भ्रम और असमंजस की स्थिति उत्पन्न की है, वह अब केवल व्यक्तिगत चिंता का विषय नहीं रह गया है। आदेश के गहन अध्ययन से यह तथ्य स्पष्ट होता है कि उक्त प्रावधान राज्य कर्मचारियों पर लागू है। यद्यपि पत्र में “बेसिक शिक्षा” शब्द का उल्लेख किया गया है, किंतु उसका आशय बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत राज्य कर्मचारी हैं, न कि परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इस आदेश को परिषदीय शिक्षकों से जोड़कर देखा जाने लगा, जिससे वेतन, सेवा शर्तों और प्रशासनिक दबाव को लेकर शिक्षकों में स्वाभाविक चिंता उत्पन्न हुई। इसी संदर्भ में प्राथमिक शिक्षक संघ अयोध्या के जिलाध्यक्ष डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लाल चंद से भेंट कर शिक्षक समाज का पक्ष मजबूती से रखा।
संघ की ओर से स्पष्ट किया गया कि परिषदीय शिक्षक राज्य कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए बिना किसी स्पष्ट शासनादेश के उन पर चल-अचल संपत्ति विवरण को लागू करना न्यायसंगत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि इस विवरण को वेतन से जोड़ना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि शिक्षक हितों के प्रतिकूल भी है।
इस मुद्दे पर केवल जिला स्तर ही नहीं, बल्कि प्रांतीय संगठन ने भी एक स्वर में आपत्ति दर्ज कराई है। प्रांतीय नेतृत्व ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि इस आदेश को परिषदीय शिक्षकों पर लागू करने का प्रयास किया गया, तो इसका संगठित, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध किया जाएगा। यह विरोध पारदर्शिता के विरुद्ध नहीं, बल्कि आदेश की अस्पष्ट और गलत व्याख्या के खिलाफ है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लाल चंद ने संघ के तर्कों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक रुख अपनाते हुए शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उनका यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि संवाद और तथ्यों के आधार पर समाधान संभव है।
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