श्रीगंगानगर : राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी की लगातार हो रही कटाई को लेकर विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ से विधायक डूंगर राम गेदर ने सदन में पर्यावरण संरक्षण, बिश्नोई समाज के लंबे आंदोलन और राज्य सरकार की कथित उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
विधायक डूंगर राम गेदर ने कहा कि खेजड़ी राजस्थान की पहचान है। यह सिर्फ राज्य वृक्ष नहीं, बल्कि देव वृक्ष के रूप में पूजनीय है। इसके बावजूद प्रदेश में वर्षों से इसकी अवैध और अंधाधुंध कटाई जारी है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण बचाओ–खेजड़ी बचाओ समिति और बिश्नोई समाज के नेतृत्व में बीकानेर संभाग में पिछले दो वर्षों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
विधायक गेदर ने सदन को अवगत कराया कि 10 नवंबर 2024 को रासिसर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर महापड़ाव प्रस्तावित था। इसी दौरान खींवसर उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए 9 नवंबर 2024 को कुचेरा में मुख्यमंत्री ने बिश्नोई समाज के संतों और प्रतिनिधियों से मुलाकात कर खेजड़ी पर सख्त कानून बनाने का भरोसा दिया था। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया। विधायक ने आरोप लगाया कि यह आश्वासन सिर्फ राजनीतिक जुमला बनकर रह गया।
करीब एक वर्ष बाद संसदीय मंत्री द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए विधायक गेदर ने कहा कि सरकार ने केवल जुर्माने की राशि बढ़ाने की घोषणा की, जो संरक्षण से ज्यादा उद्योगपतियों को राहत देने वाला कदम साबित हुआ। पहले पेड़ काटने पर 100 रूपये जुर्माना था जिसे बढ़ाकर 1000 हजार कर दिया गया। छह माह की सजा को हटाकर 5000 हजार रूपये जुर्माना कर दिया गया। उनका कहना था कि इस फैसले से खेजड़ी की कटाई को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला है।
विधायक ने बताया कि बीकानेर के नोखादहिया गांव में रामगोपाल बिश्नोई के नेतृत्व में 567 दिनों से धरना जारी है। वहीं जिला कलेक्ट्रेट के सामने 201 दिनों से आंदोलन चल रहा है। 19 दिसंबर 2025 को मुकाम में स्वामी रामानंद जी के नेतृत्व में महापंचायत हुई, जिसमें 2 फरवरी को बीकानेर में महापड़ाव का ऐलान किया गया। सरकार को पूरी जानकारी होने के बावजूद आज तक किसी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ने आंदोलनकारियों से संवाद नहीं किया।
वर्तमान में आंदोलन के तीसरे दिन 29 संत, एक साध्वी, 60 महिलाएं और 429 पुरुष अन जल त्याग आमरण अनशन पर बैठे हैं। तीन आंदोलनकारियों की तबीयत भी खराब हो चुकी है, फिर भी सरकार का कोई प्रतिनिधि संवाद के लिए नहीं पहुंचा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह साधु-संतों से तुरंत बातचीत करे और खेजड़ी संरक्षण को लेकर स्पष्ट एवं प्रभावी नीति बनाए।
विधायक गेदर ने सरकार के समक्ष तीन स्पष्ट मांगें रखीं-
1. खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कानून तुरंत लागू किया जाए
2. आमरण अनशन पर बैठे संतों और आंदोलनकारियों से तत्काल वार्ता की जाए
3. पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार अपनी नीत और नीयत स्पष्ट करे
खेजड़ी बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा
अपने वक्तव्य के अंत में विधायक डूंगर राम गेदर ने भावुक शब्दों में कहा-
मां अमृता बाई अमर रहें।
खेजड़ी बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा।
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