बरेलीः समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कल यानी 8 अक्टूबर को रामपुर दौरे पर जाएंगे। यहां अखिलेष का पार्टी के वरिष्ठ नेता और अभी हाल ही में जेल से जमानत पर बाहर आए आजम खान से उनके आवास पर मुलाकात का कार्यक्रम है। जेल से रिहा होने के बाद यह पहली बार होगा जब दोनों नेता आमने-सामने बैठकर गुफ्तगूं करेंगे। सियासत पर कड़ी और पैनी नजर रखने वाले विश्लेषक इस मुलाकात को पार्टी के भीतर की रणनीति, आपसी समीकरणों और आगामी चुनावी की तैयारियों के लिहाज से बहुत अहम मान रहे हैं।
हालांकि अखिलेश का यह दौरा रामपुर तक सीमित है, लेकिन इसका प्रभाव बरेली में भी साफ देखा जा सकता है। चूंकि अखिलेश यादव का विमान लखनऊ से उड़ान भरकर बरेली एयरपोर्ट पर लैंड करेगा, और वहीं से वे सड़क मार्ग द्वारा रामपुर जाएंगे, इसलिए बरेली प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। पिछले दिनों बवाल के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने बरेली में आने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें या तो बीच रास्ते से ही लौटा दिया गया था या फिर घर में नजरबंद कर दिया गया था। अब जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बरेली में कुछ देर के लिए रुकने की संभावना है तो सपा कार्यकर्ताओं के सक्रिय होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि आजम खान और अखिलेश यादव के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक और निजी दूरियां हैं। आजम खान ने कई मौकों पर अखिलेश की चुप्पी या उदासीनता पर तंज कसते हुए बयान र्दिए, वहीं अखिलेश भी काफी समय तक सार्वजनिक रूप से उनसे दूरी बनाए रखे हुए थे। अब यह मुलाकात कई पुराने सवालों का जवाब दे सकती है, विशेषकर यह कि समाजवादी पार्टी में आजम की भविष्य की भूमिका क्या होगी।
हालांकि अखिलेश का बरेली में केवल 15 मिनट ही रूकेंगे लेकिन उनके समर्थकों और सपा कार्यकर्ताओं में इस दौरान मुलाकात की प्रबल इच्छा देखी जा रही है। इसके चलते प्रशासन को आशंका है कि अखिलेश बरेली में हाल ही में प्रभावित परिवारों से मिलने का प्रयास भी कर सकते हैं। इसलिए पुलिस और खुफिया विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और एयरपोर्ट से रामपुर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
रामपुर में अखिलेश की यह मुलाकात केवल आजम खान से एक औपचारिक भेंट नहीं मानी जा रही है, बल्कि इसे पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों की संकेतात्मक शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मुलाकात आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 और यूपी विधानसभा उपचुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
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