Social Media Content पर लगाम जरूरी: किशोरों पर दुष्प्रभाव को लेकर Harbhajan Singh चिंतित

खबर सार :-
सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच के साथ अश्लील सामग्री का प्रसार एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है। हरभजन सिंह ने संसद में इस मुद्दे को उठाकर बच्चों और किशोरों की मानसिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि तकनीकी निगरानी, सख्त कानून और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

Social Media Content पर लगाम जरूरी: किशोरों पर दुष्प्रभाव को लेकर Harbhajan Singh चिंतित
खबर विस्तार : -

Social Media Pornography Content Regulation: सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अश्लील और अशोभनीय सामग्री को लेकर चिंता अब संसद तक पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी के सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में इस विषय को उठाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही अश्लीलता का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चों और किशोरों पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में तुरंत ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

राज्यसभा में बोलते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि यह केवल तकनीकी या कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे समाज, हमारी नैतिकता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक अत्यंत गंभीर प्रश्न है। उनका कहना था कि सोशल मीडिया आज के समय में ज्ञान, संवाद और नवाचार का एक बड़ा माध्यम बन चुका है, लेकिन उसी मंच पर तेजी से फैल रही अश्लील सामग्री बच्चों और किशोरों के मानसिक विकास को प्रभावित कर रही है।

बच्चों के लिए इंटरनेट और Social Media तक पहुंचना आसान

हरभजन ने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों की पहुंच इंटरनेट और सोशल मीडिया तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है। मोबाइल फोन और इंटरनेट के प्रसार के कारण किशोर कम उम्र में ही ऐसे कंटेंट के संपर्क में आ जाते हैं, जो उनकी उम्र और मानसिक स्थिति के लिए उपयुक्त नहीं होता। कई शोधों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में कम उम्र के बच्चे अशोभनीय और वयस्क सामग्री देख रहे हैं, जिससे उनकी सोच और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

Harbhajan Sing-Pornography Content

महिलाओं के प्रति मानसिकता में बदलाव का प्रमुख बन रहा कारण Social Media कंटेंट

हरभजन सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 13 या 14 वर्ष का कोई बच्चा लगातार सोशल मीडिया पर अश्लील तस्वीरें और वीडियो देखता है, तो उसके मन में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना कैसे विकसित होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री बच्चों के मन में महिलाओं के प्रति गलत दृष्टिकोण पैदा कर सकती है। धीरे-धीरे यह प्रवृत्ति उन्हें महिलाओं को एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक वस्तु के रूप में देखने की ओर ले जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी मानसिकता आगे चलकर समाज में अपराध, उत्पीड़न और लैंगिक असमानता जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है। इसलिए इस विषय को केवल व्यक्तिगत नैतिकता का प्रश्न नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देखना आवश्यक है।

'Age Verification अनिवार्य' का पालन नहीं करने वालों पर हो सख्ती

सांसद ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय उदाहरण भी पेश किए। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों ने इस खतरे को समझते हुए कड़े कदम उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर फ्रांस ने कई वयस्क वेबसाइटों के लिए आयु सत्यापन (एज वेरिफिकेशन) को अनिवार्य किया है। यदि कोई वेबसाइट इन नियमों का पालन नहीं करती है तो नियामक संस्थाओं को उसे बंद करने का अधिकार भी दिया गया है। इसी प्रकार यूनाइटेड किंगडम ने अपने ऑनलाइन सुरक्षा कानून के तहत कई वयस्क वेबसाइटों पर पहचान और आयु की पुष्टि अनिवार्य करने का प्रावधान किया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अश्लील सामग्री पर कड़ी निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर भारी दंड का प्रावधान किया गया है।

Social Media Regulation-Harbhajan Singh

Social Media पर परोसे जा रहे कंटेंट के लिए बने कठोर निगरानी तंत्र

हरभजन सिंह ने कहा कि इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि विकसित देश इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां हमारी सभ्यता और संस्कृति नारी सम्मान, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं पर आधारित रही है, वहां इस विषय पर गंभीर चिंतन और प्रभावी नीति बनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री की निगरानी को मजबूत किया जाए। इसके साथ ही आयु सत्यापन की व्यवस्था लागू की जाए ताकि कम उम्र के बच्चे ऐसी सामग्री तक आसानी से न पहुंच सकें। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मक गतिविधियों के लिए Social Media का उपयोग

हरभजन सिंह का मानना है कि सोशल मीडिया का उपयोग शिक्षा, ज्ञान और रचनात्मक गतिविधियों के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं, लेकिन यदि उनका इस्तेमाल अशोभनीय सामग्री फैलाने के लिए होगा तो यह समाज और बच्चों के भविष्य दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण आधारशिला है, लेकिन जब कोई गतिविधि बच्चों के हितों और समाज की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने लगे, तो उस पर संतुलित और जिम्मेदार नियंत्रण आवश्यक हो जाता है।

 

 

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