US-Iran तनाव पर रूस की बड़ी चेतावनी: ‘संयम बरतें, वरना पश्चिम एशिया में भड़क सकता है बड़ा संकट’
खबर सार :-
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। रूस और चीन की संयम बरतने की अपील यह दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष से बचना चाहता है। मौजूदा हालात में कूटनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान ही सबसे प्रभावी विकल्प हैं, क्योंकि किसी भी व्यापक सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
खबर विस्तार : -
Maria Zakharova's statement: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को अस्थिरता के दौर में पहुंचा दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि रूस और चीन समेत कई प्रमुख देशों ने खुलकर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने की अपील की है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिका-इजरायल की भूमिका पर सवाल: रूसी विदेश मंत्रालय
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मॉस्को अमेरिका और ईरान के बीच उभर रहे नए सैन्य टकराव को लेकर बेहद चिंतित है। उन्होंने कहा कि रूस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और चाहता है कि सभी पक्ष तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। जखारोवा ने मौजूदा घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई का विस्तार पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। रूस ने इस तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। जखारोवा ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और संघर्ष की स्थिति को रोकने के लिए सभी देशों को जिम्मेदारी दिखानी होगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सैन्य समाधान किसी भी समस्या का स्थायी विकल्प नहीं हो सकता और कूटनीतिक संवाद ही संकट का सबसे प्रभावी रास्ता है।
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनावः गंभीर टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद का सबसे गंभीर टकराव माना जा रहा है। अमेरिका जहां अपनी सैन्य कार्रवाइयों को आत्मरक्षा का कदम बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। इस बीच, ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने हालात को और जटिल बना दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी कदमों के जवाब में की गई है। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
रूस और ईरान के संबंध लंबे समय से रणनीतिक सहयोगी
रूस और ईरान के संबंध लंबे समय से रणनीतिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। दोनों देशों के बीच अमेरिका की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और इराक से जुड़ी नीतियों को लेकर समान दृष्टिकोण देखा जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों में भी उल्लेखनीय मजबूती आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई बार ईरान को रूस की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल बता चुके हैं।
चीन ने जताई गंभीर चिंताः संयम बरतने की अपील
चीन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लीन जिआन ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सभी पक्षों को संयम बनाए रखना चाहिए और किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़े। उन्होंने कहा कि संघर्ष को बढ़ाने से किसी का लाभ नहीं होगा, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की शांति और विकास प्रभावित होगा।
ईरानी हमलों की खाड़ी देशों ने की आलोचना
बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के आसपास हुए ईरानी हमलों की संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य खाड़ी देशों ने आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं। खाड़ी देशों ने सभी पक्षों से वार्ता और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में रूस, चीन और अन्य देशों की अपील को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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