Ranji Trophy Final 2025-26: जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया। पारस डोगरा की कप्तानी वाली जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता। हुबली के डी.आर. बेंद्रे क्रिकेट स्टेडियम में 8 बार की चैंपियन कर्नाटक के खिलाफ खेले गए इस मैच में जम्मू-कश्मीर को पहली पारी की बढ़त के आधार पर विजेता घोषित किया गया। हालांकि मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इसी के साथ ही जम्मू-कश्मीर की टीम ने 65 सालों के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
मैच की बात करें तो जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। पहले बल्लेबाजी करते हुए शुभम पुंडीर के 121, यवीर हसन खान के 88, साहिल लोत्रा के 72, कन्हैया वधावन के 70 और कप्तान पारस डोगरा के 70 रनों की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 584 रन बनाए। जवाब में कर्नाटक की पहली पारी 293 रन पर खत्म हुई। कर्नाटक के कप्तान मयंक अग्रवाल ने कर्नाटक के लिए सबसे ज़्यादा 160 रन बनाए। इसके अलावा कोई कोई बल्लेबाज़ जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों के आगे क्रीज़ पर टिक नहीं सका। जम्मू-कश्मीर के लिए आकिब नबी ने सबसे ज्यादा 5 विकेट लिए। वहीं सुनील कुमार और युदवीर सिंह को 2-2 विकेट मिले, जबकि साहिल लोत्रा ने 1 विकेट लिया।
इस तरफ जम्मू-कश्मीर, जिसने पहली पारी में 291 रनों की बड़ी बढ़त ली। हालांकि दूसरी पारी में 11 रन पर 2 विकेट खोने के बावजूद ज़बरदस्त वापसी की। जम्मू और कश्मीर ने अपनी दूसरी पारी 4 विकेट पर 342 रन बनाकर घोषित कर दी। ओपनर कामरान इकबाल 160 और साहिल लोत्रा 101 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों ने 197 रन की नाबाद पार्टनरशिप की। साहिल के शतक बनाते ही कप्तान पारस डोगरा ने पारी घोषित कर दी। इसके बाद मैच ड्रॉ घोषित कर दिया गया, जिससे जम्मू और कश्मीर को नया रणजी ट्रॉफी चैंपियन मिला। शुभम पुंडीर को प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया, जबकि आकिब नबी को प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट चुना गया।
जम्मू-कश्मीर ने 67 साल के इतिहास में अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीत लिया है। पारस डोगरा की कप्तानी में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। कामरान इकबाल और साहिल लोत्रा के शानदार शतकों की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक को हराया। उन्हें पहली पारी की बढ़त के आधार पर चैंपियन घोषित किया गया।
गौरतलब है कि करीब 67 साल पहले रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने वाली जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने सभी मुश्किलों को पार करते हुए पहली बार खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि पूरे इलाके के लिए नई उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित करेगी और एक नए युग की शुरुआत करेगी।
1934-35 से खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के इतिहास में मुंबई की टीम ने सबसे ज़्यादा बार यानी 42 बार खिताब जीता है। 8 बार -कर्नाटक/मैसूर, दिल्ली 7, मध्य प्रदेश 5, बड़ोदा 5, सौराष्ट्र 3 और विदर्भ ने 2 बार रणजी ट्रॉफी का खिलाब जीता। इसके बंगाल 2, तमिलनाडु/मद्रास 2, राजस्थान 2, हैदराबाद 2, महाराष्ट्र 2 और रेलवे ने दो बार खिलाफ अपने नाम किया। जबकि उत्तर प्रदेश,पंजाब, हरियाणा और गुजरात की टीमों ने एक-एक बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने में सफल रही।