Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को दो दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनकी यात्रा को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन, वीवीआईपी मूवमेंट के लिए विशेष रूट और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ाई गई है। भारत और रूस दशकों पुराने रणनीतिक साझेदार रहे हैं, ऐसे में पुतिन का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यह रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है। ऐसे में वैश्विक परिस्थिति, रक्षा सहयोग और आर्थिक मुद्दों पर गहन बातचीत की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच शिखर वार्ता में कई रणनीतिक फैसलों पर मुहर लग सकती है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का आधार रहा है। एसयू-30 एमकेआई, एमआईजी-29, और एस-400 सिस्टम इसका प्रमुख उदाहरण हैं। दोनों देशों के संयुक्त प्रोजेक्ट ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल ने इस साझेदारी को और मजबूत किया है। सूत्रों के मुताबिक, एस-400 की नई खेप को लेकर मोदी और पुतिन के बीच चर्चा संभव है। वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच 5 अरब डॉलर की डील हुई थी, जिसके तहत भारत को एस-400 के पांच यूनिट मिलने हैं। इनमें से तीन की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि बाकी दो पर आगे की योजना बनाई जानी है। इसके अलावा भारत उन्नत एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम को खरीदने पर भी विचार कर रहा है। इस सिस्टम को लेकर भी दोनों नेताओं की बातचीत की संभावना जताई जा रही है। वहीं रूस सुखोई-57 लड़ाकू विमान की लगभग 70% तकनीक भारत को ट्रांसफर करने की पेशकश कर चुका है। यदि इस पर सहमति बनती है, तो भविष्य में भारत एस-57 का घरेलू निर्माण कर सकता है। एस-30 बेड़े के आधुनिकीकरण पर भी चर्चा संभव है, जिससे वायुसेना की क्षमताएं और बढ़ेंगी।

यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी को मजबूती देने के प्रयासों में जुटा है। रूस चाहता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार 5 अरब डॉलर से आगे बढ़े। इसी दिशा में स्थानीय मुद्राओं—रूबल और रुपये—में व्यापार करने पर दोनों देश विचार कर रहे हैं, ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके। इसके साथ ही भारत से खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, दवाओं, इंजीनियरिंग उत्पादों और डिजिटल सेवाओं के निर्यात बढ़ाने पर भी ज़ोर रहेगा। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, तेल की खरीद, एलएनजी सप्लाई, और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर भी उच्चस्तरीय वार्ता की उम्मीद है। मोबिलिटी समझौते, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौते या मौजूदा समझौतों के अपडेट भी इस दौरे का हिस्सा हो सकते हैं। इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों में नई गति आने की संभावना जताई जा रही है।
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