Samvidhan Diwas 2025 Live : संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत के लोकतंत्र को दुनिया के लिए एक आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते न केवल अपनी विविधता में एकता का प्रतीक है, बल्कि दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों का सबसे शक्तिशाली उदाहरण प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान दिवस के अवसर पर लोकसभा और राज्यसभा के दोनों सदनों के सांसदों की भूमिका की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था के तहत, हमारे देश की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका ने मिलकर देश के विकास की गति को तेज किया है और नागरिकों के जीवन में अमूलचूल सुधार किया है। राष्ट्रपति ने भारतीय संसद की परंपरा की भी सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और संकल्प लिया कि संसद के दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमारे संविधान और लोकतंत्र की यह गौरवशाली परंपरा आज केवल हमारे देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में संविधान के निर्माणकर्ताओं के दूरदर्शी दृष्टिकोण और उनके द्वारा दिए गए अधिकारों की प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने हालिया सरकारी नीतियों और देश में हो रहे सामाजिक-राजनीतिक बदलावों का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस दिन डिजिटल रूप में भारतीय संविधान के नौ भाषाओं में संस्करणों की शुरुआत की, जिसमें कश्मीरी और बोडो भाषाओं के संस्करण भी शामिल थे।
उनके संबोधन के पांच प्रमुख उद्धरण इस प्रकार थे-
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