Parliament Session 2025: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही फर्जी खबरें और भ्रामक सूचनाएँ भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गलत जानकारी, हेरफेर किए गए वीडियो और एआई-जनरेटेड डीपफेक लोगों की सोच को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए इस पर तुरंत सख्त कार्रवाई और मजबूत कानूनी ढांचा आवश्यक है। मंत्री ने कहा कि कुछ लोग और समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग इस तरह कर रहे हैं, मानो वे भारत के संविधान या संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए कठोर नियम और निगरानी तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वैष्णव ने बताया कि सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नियमों में आपत्तिजनक या भ्रम फैलाने वाले वीडियो को 36 घंटों के भीतर हटाने का प्रावधान शामिल है। इसके साथ ही एआई आधारित डीपफेक की पहचान करने और तुरंत कार्रवाई के लिए एक मसौदा नियम भी तैयार किया गया है, जिस पर विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ विमर्श चल रहा है। उन्होंने संसदीय समिति द्वारा दिए गए सुझावों की सराहना करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे सहित सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने कानूनी ढांचा मजबूत करने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि फर्जी खबरों के खिलाफ लड़ाई सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवैधानिक महत्व का मुद्दा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की सुरक्षा—इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया ने तकनीक को जनता तक पहुंचाया है। इससे समाज में पारदर्शिता, भागीदारी और सूचना तक स्वतंत्र पहुँच जैसे सकारात्मक बदलाव आए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सोशल मीडिया ने हर नागरिक को आवाज दी है, लेकिन इसके जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकार का उद्देश्य ऐसा मजबूत तंत्र विकसित करना है, जो संस्थाओं में जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत कर सके।
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