नई दिल्ली: भारत में युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से लैस करने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी बजाज ऑटो लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते का उद्देश्य उद्योग आधारित कौशल विकास को मजबूत करना और युवाओं को उन्नत ऑटोमोबाइल विनिर्माण तकनीकों का प्रशिक्षण देना है, ताकि वे आधुनिक औद्योगिक वातावरण में काम करने के लिए तैयार हो सकें।
यह समझौता मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) और बजाज ऑटो के बीच फ्लेक्सी-एमओयू योजना के तहत किया गया है। इस योजना के अंतर्गत उद्योगों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अपनी तकनीकी आवश्यकताओं और क्षेत्रीय मांगों के अनुरूप तैयार करने की अनुमति दी जाती है। समझौते के तहत बजाज ऑटो इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर (आईटीपी) के रूप में कार्य करेगा और महाराष्ट्र तथा उत्तराखंड में स्थित अपने विनिर्माण संयंत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा।
कंपनी ने इस पहल के तहत पहले वर्ष में ही लगभग 1,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप होंगे और इनकी अवधि 24 महीने तक होगी। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को कक्षा आधारित शिक्षा के साथ-साथ अत्याधुनिक उत्पादन प्रणालियों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे युवाओं को वास्तविक उत्पादन वातावरण में काम करने का अनुभव मिलेगा और वे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित कर सकेंगे।
इस समझौते पर आयोजित हस्ताक्षर समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, डीजीटी के महानिदेशक दिलीप कुमार और उप महानिदेशक सुनील कुमार गुप्ता सहित कई अधिकारी मौजूद थे। कंपनी की ओर से मुख्य मानव संसाधन अधिकारी रवि किरण रामासामी और अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि यह साझेदारी भारत में उद्योग-आधारित कौशल विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जब प्रशिक्षण कार्यक्रम सीधे उद्योग और वास्तविक उत्पादन प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, तो युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलता है और उनकी रोजगार क्षमता भी बढ़ती है।
फ्लेक्सी-एमओयू योजना के तहत उद्योगों को प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने में पर्याप्त लचीलापन मिलता है। इसमें न्यूनतम 100 प्रशिक्षुओं की वार्षिक क्षमता सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके साथ ही प्रशिक्षण के दौरान उद्योग आधारित मूल्यांकन और प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा भी शामिल होती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सफल अभ्यर्थियों को राष्ट्रीय ट्रेड सर्टिफिकेट (एनटीसी) प्रदान किया जाएगा, जो उन्हें आगे अप्रेंटिसशिप और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षुओं को ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम, क्वालिटी कंट्रोल, प्लांट मेंटेनेंस, मेकट्रॉनिक्स, वेल्डिंग, असेंबली ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, बल्कि उद्योगों को भी कुशल तकनीशियनों की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों को कम से कम 50 प्रतिशत सफल प्रशिक्षुओं को रोजगार या अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। इससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच सीधा संबंध स्थापित होगा और युवाओं को प्रशिक्षण के बाद बेहतर भविष्य की संभावनाएं मिलेंगी।
बजाज ऑटो लिमिटेड पहले से ही कौशल विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। कंपनी अपनी कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत अपने कुल व्यय का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा कौशल विकास कार्यक्रमों पर खर्च करती है। कंपनी द्वारा संचालित ‘बजाज इंजीनियरिंग स्किल्स ट्रेनिंग’, ‘बजाज मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम्स’ और ‘बजाज स्टेप’ जैसे कार्यक्रम हर साल 90,000 से अधिक छात्रों और युवाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत में उद्योग और शिक्षा के बीच की दूरी को कम करने में मदद करेंगी और देश के युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाएंगी। इसके साथ ही यह पहल भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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