कागजी फाइल से डिजिटल फॉर्म तक: आजादी से अब तक आम बजट का बदला हुआ चेहरा

खबर सार :-
आजादी के बाद से अब तक आम बजट ने कागजी फाइलों से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक लंबा सफर तय किया है। तारीख, समय, प्रस्तुति और प्राथमिकताओं में हुए बदलाव भारत की बदलती आर्थिक सोच को दर्शाते हैं। केंद्रीय बजट अब सिर्फ लेखा-जोखा नहीं, बल्कि पारदर्शिता, आधुनिकता और समावेशी विकास का मजबूत माध्यम बन चुका है।

कागजी फाइल से डिजिटल फॉर्म तक: आजादी से अब तक आम बजट का बदला हुआ चेहरा
खबर विस्तार : -

Budget History: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा। इसके साथ ही वह भारत की ऐसी पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी, जिन्होंने नौ बार लगातार आम बजट पेश किया हो। वहीं, यह भारत के संसदीय इतिहास का 80वां केंद्रीय बजट भी होगा। यह मौका न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि यह हमें यह सोचने का भी अवसर देता है कि आजादी के बाद से अब तक आम बजट ने कितना लंबा और दिलचस्प सफर तय किया है।

आम बजट: सिर्फ आंकड़े नहीं, नीति और सोच का आईना

भारत का केंद्रीय बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होता। यह देश की आर्थिक प्राथमिकताओं, सरकार की नीतिगत सोच और भविष्य की दिशा को दर्शाता है। आजादी के बाद से जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बदली, वैसे-वैसे बजट की परंपराएं, प्रस्तुति और उद्देश्य भी बदलते चले गए।

ब्रिटिश दौर से आजाद भारत तक बजट का सफर

भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था, जब देश ब्रिटिश शासन के अधीन था। आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को संसद में पेश किया गया। तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी द्वारा प्रस्तुत यह बजट आजादी के बाद की आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। उस दौर में देश का फोकस पुनर्निर्माण, खाद्यान्न सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर था।

28 फरवरी से 1 फरवरी तक: तारीख में ऐतिहासिक बदलाव

कई दशकों तक भारत में केंद्रीय बजट हर साल 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। लेकिन वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने इस परंपरा को तोड़ते हुए बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी। इसका उद्देश्य था कि बजट से जुड़ी योजनाएं नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही लागू हो सकें और राज्यों को भी बेहतर योजना बनाने का समय मिल सके।

शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक

एक समय ऐसा भी था जब बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान, तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदलकर बजट को सुबह 11 बजे पेश करने की शुरुआत की। तब से लेकर आज तक यही समय बजट प्रस्तुति का मानक बना हुआ है।

ब्रीफकेस से लाल कपड़े तक

साल 2019 तक बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में संसद लाने की परंपरा थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे बदलते हुए बजट को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पेश किया। यह कदम भारतीय परंपरा और औपनिवेशिक विरासत से दूरी का प्रतीक माना गया।

कागज से डिजिटल युग में प्रवेश

पहले बजट के दस्तावेज भारी-भरकम कागजी फाइलों में पेश होते थे। लेकिन 2021 में पहली बार भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह डिजिटल फॉर्म में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही ‘बजट ऐप’ लॉन्च किया गया, जिससे आम नागरिक भी आसानी से बजट की जानकारी हासिल कर सकें। यह कदम पारदर्शिता और डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा बदलाव था।

रेल बजट का आम बजट में विलय

आजादी के बाद लंबे समय तक देश में अलग से रेल बजट पेश किया जाता रहा। लेकिन 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में शामिल कर दिया गया। सरकार का मानना था कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रेलवे के विकास को समग्र आर्थिक नीति से जोड़ा जा सकेगा।

रविवार को बजट पेश होना कोई नई बात नहीं

आम बजट 2026-27 को लेकर चर्चाएं इसलिए भी तेज हैं, क्योंकि इस बार बजट पेशन होने की तिथि 1 फरवरी और दिन रविवार है। हालांकि संसदीय इतिहास बताता है कि जरूरत पड़ने पर अवकाश वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही हो चुकी है। 2020 में कोविड महामारी के दौरान रविवार को संसद की बैठक हुई थी। 2015 और 2016 में अरुण जेटली ने शनिवार को बजट पेश किया था, जबकि 2025 में निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार को बजट प्रस्तुत किया था। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस पर अंतिम फैसला सही समय पर लिया जाएगा।

बदलती प्राथमिकताएं, बदलता भारत

आजादी के बाद जब सरकार बनी तो शुरुआती दौर में बजट का फोकस कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर था। समय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और सामाजिक कल्याण जैसे विषय बजट की प्राथमिकताओं में शामिल होते गए। आज का बजट आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर केंद्रित नजर आता है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट में हुए ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक नीति समय के साथ अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक होती गई है। कागजी फाइलों से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक का यह सफर भारत की बदलती सोच और विकास की रफ्तार को साफ तौर पर दर्शाता है।

 

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