India-Brazil Relation: भारत और ब्राजील 21वीं सदी की उभरती शक्तियों में गिने जाते हैं। भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार गहराता गया है। वर्ष 2006 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी आज बहुआयामी स्वरूप ले चुकी है। नई दिल्ली में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की उपस्थिति में स्टील क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने हेतु हुए एमओयू ने इस रिश्ते को नई दिशा दी है। यह संबंध केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की साझा आकांक्षाओं, संसाधनों की पूरकता और तकनीकी सहयोग पर आधारित है।
भारत और ब्राजील ने स्टील निर्माण के लिए आवश्यक खनन और खनिज क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य स्टील मूल्य श्रृंखला में तकनीकी सुधार, कच्चे माल की स्थिर उपलब्धता और दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ब्राजील लौह अयस्क का अग्रणी उत्पादक है और मैंगनीज, निकेल तथा नाइओबियम जैसे खनिजों के बड़े भंडार रखता है। भारत, जिसकी वर्तमान इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 218 मिलियन टन है, बढ़ती घरेलू मांग के चलते कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति चाहता है। इस एमओयू के अंतर्गत खनिज अन्वेषण और खनन में निवेश बढ़ेगा, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण तकनीकों में सहयोग होगा, एआई आधारित भू-वैज्ञानिक डेटा विश्लेषण को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरणीय प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाएं अपनाई जाएंगी। यह पहल वैश्विक सप्लाई चेन में स्थिरता लाने और स्टील उद्योग को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रपति लूला ने संकेत दिया है कि 2030 तक भारत–ब्राजील द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2006 में यह व्यापार केवल 2.4 अरब डॉलर था, जो अब लगभग 15 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। पिछले वर्षों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। ब्राजील कृषि, खनिज, एयरोस्पेस, बायोएनर्जी में निवेश बढ़ाना चाहता है, तो भारत आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण, डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने का इच्छुक है। इंडिया–ब्राजील बिजनेस फोरम में यह स्पष्ट किया गया कि दूरी सहयोग में बाधा नहीं है। बल्कि, लॉजिस्टिक्स और समुद्री संपर्क बेहतर कर दोनों देश व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

एयरोस्पेस क्षेत्र में ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के बीच भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने का समझौता हुआ है। यह समझौता भारत में विमानन विनिर्माण को बढ़ावा देगा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती प्रदान करेगा। खनिज क्षेत्र में एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने का लगभग 500 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ है। यह परियोजना स्टील उत्पादन के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
भारत और ब्राजील दोनों देशों ने भविष्य उन्मुख डिजिटल साझेदारी पर भी सहमति जताई है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्वांटम तकनीक और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। भारत स्टैक फ्रेमवर्क के अनुभव से ब्राजील को लाभ मिल सकता है, जबकि ब्राजील के नवाचार और अनुसंधान मॉडल से भारत को नई प्रेरणा मिलेगी। रेयर अर्थ एलिमेंट्स और जरूरी खनिजों में सहयोग से तकनीक हस्तांतरण और अनुसंधान विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे निवेश आकर्षित होगा और दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताएं सुदृढ़ होंगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते किए गए हैं। इससे दवाओं की मान्यता और जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा क्षेत्र में भारतीय जनसंचार संस्थान और मिनास गेरैस संघीय विश्वविद्यालय के बीच सहयोग से छात्र और फैकल्टी आदान-प्रदान बढ़ेगा। इसी प्रकार सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और साओ पाउलो विश्वविद्यालय के बीच साझेदारी फिल्म और मीडिया शिक्षा में नए अवसर पैदा करेगी। ब्राजील द्वारा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए 10 वर्ष का बिजनेस वीजा विस्तार, व्यावसायिक और मानवीय संपर्कों को और प्रोत्साहित करेगा।
भारत और ब्राजील बहुपक्षीय मंचों पर भी घनिष्ठ सहयोगी रहे हैं। दोनों देश ब्रिक्स और जी20 जैसे मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की दिशा में कार्य करते हैं। दोनों देशों ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार, बौद्धिक संपदा अधिकारों में समान अवसर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है।

भारत और ब्राजील के बीच रक्षा सहयोग अभी सीमित है, लेकिन एयरोस्पेस उत्पादन और रक्षा विनिर्माण में बढ़ती भागीदारी भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती है। समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग में भी दोनों देश साझा हित रखते हैं। हिंद महासागर और दक्षिण अटलांटिक क्षेत्रों में सामरिक संवाद बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत-ब्राजील के बीच संबंधों को नया आयाम देने की कोशिशें जारी हैं। इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की मित्रता अहम भूमिका निभा रही है। इन सबके बावजूद दोनों देशों के समक्ष कुछ चुनौतियां भी हैं, जिन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। इसमें भौगोलिक दूरी और परिवहन लागत, व्यापारिक विविधता का अभाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, संभावित समाधान, समुद्री संपर्क और लॉजिस्टिक्स सुधार, मुक्त व्यापार समझौतों की संभावनाएं, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी, नवाचार और हरित प्रौद्योगिकी में संयुक्त निवेश प्रमुख हैं।
भारत और ब्राजील के संबंध आज केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। स्टील क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने वाला एमओयू इस बात का संकेत है कि दोनों देश दीर्घकालिक और टिकाऊ साझेदारी की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। 2030 तक 30 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य, डिजिटल साझेदारी, एयरोस्पेस सहयोग और शिक्षा-सांस्कृतिक आदान-प्रदान इस रिश्ते को बहुआयामी बना रहे हैं। यदि दोनों देश अपनी पूरक क्षमताओं का प्रभावी उपयोग करें और रणनीतिक दृष्टि बनाए रखें, तो भारत–ब्राजील संबंध वैश्विक दक्षिण के लिए सहयोग का एक आदर्श मॉडल बन सकते हैं। यह साझेदारी न केवल आर्थिक समृद्धि बल्कि वैश्विक मंचों पर संतुलित और न्यायपूर्ण व्यवस्था की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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