अमेरिका का यह नया शुल्क उन भारतीय उत्पादों पर लागू होगा जो 27 अगस्त 2025 को या उसके बाद अमेरिका में पहुंचेंगे। इसका मतलब है कि भारतीय कपड़े, जेम्स और ज्वैलरी, फर्नीचर, और सी फूड जैसी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इससे इन उत्पादों की मांग में लगभग 70 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका में सस्ते दामों पर चीन, वियतनाम, मेक्सिको जैसे देशों के उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से भारतीय कंपनियों को कठिनाई हो सकती है। भारतीय सामान पर बढ़े हुए शुल्क से, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी घट सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
7 अगस्त को, ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा। इस निर्णय के बाद, अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय सामान पर पहले से मौजूद 25 फीसदी शुल्क को दोगुना कर दिया है। यह कदम अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा जारी किए गए मसौदा आदेश के बाद लागू हुआ, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि बढ़े हुए शुल्क का प्रभाव 27 अगस्त के बाद होने वाले निर्यातों पर पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के अलावा, लगभग 70 अन्य देशों पर भी 25 फीसदी शुल्क लागू किया था। ट्रंप के इस कदम से वैश्विक व्यापार के माहौल में खलबली मच गई है। इससे अमेरिकी कंपनियां और अन्य देशों के निर्यातक देशों पर भी दबाव महसूस करेंगे, जो इससे बचने के लिए रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
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