Israel Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात को लेकर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संघर्ष का टाटा समूह या भारत के कारोबार पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा है।
एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे। इस दौरान टाटा स्टील परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शहरवासियों को संस्थापक दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेन्द्रन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखरन ने कहा कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र से टाटा समूह को लाइमस्टोन सहित कई अहम कच्चे माल का आयात होता है। टाटा समूह का कारोबार विश्वभर में फैला हुआ है, जिसमें स्टील, ऑटोमोबाइल, आईटी, होटल, वित्तीय सेवाएं और उपभोक्ता उत्पाद जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में यदि युद्ध लंबा चलता है, तो सप्लाई चेन में व्यवधान, माल की डिलीवरी में देरी, शिपिंग लागत में वृद्धि और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ने से सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों और दीर्घकालिक व्यापार योजनाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि टाटा समूह के कर्मचारी दुनिया के विभिन्न देशों में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, हॉस्पिटैलिटी और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए समूह अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। कंपनी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।
रोजगार के मुद्दे पर चंद्रशेखरन ने सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नई इकाइयों की स्थापना, विस्तार योजनाओं और विविध क्षेत्रों में निवेश के कारण रोजगार के अवसरों में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले पांच-छह वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग सात लाख थी, जो अब बढ़कर करीब 11 लाख तक पहुंच चुकी है। आने वाले पांच से छह वर्षों में इस संख्या को 15 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह विस्तार न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि देश में कौशल विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगा।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि टाटा समूह महिला कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में समूह में महिलाओं की भागीदारी लगभग 28 से 30 प्रतिशत के बीच है, जिसे और बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विविधता और समावेशन कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
आईटी क्षेत्र और नई तकनीकों पर चर्चा करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग को लेकर रोजगार के संदर्भ में आशंकाएं स्वाभाविक हैं। लेकिन उनका मानना है कि नई तकनीकें अवसरों के नए द्वार भी खोलती हैं। एआई के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में दक्षता बढ़ेगी और नए प्रकार की नौकरियां सृजित होंगी। इसका सकारात्मक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी मिलेगा, जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और तकनीकी समाधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
समापन में उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद टाटा समूह अपनी दीर्घकालिक रणनीति, सतत विकास और सामाजिक प्रतिबद्धताओं के साथ आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनौतियों के बावजूद भारतीय उद्योग जगत मजबूत आधार और दूरदर्शी नेतृत्व के दम पर आगे बढ़ेगा।
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