India Oman trade deal CEPA 2026: भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता किसानों, कारीगरों, महिलाओं, मछुआरों, छात्रों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। इसके जरिए भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में पहले की तुलना में कहीं अधिक अनुकूल और प्रतिस्पर्धी वातावरण मिलेगा।
सरकार के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद ओमान में भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को कवर करने वाली 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त होगी। इससे पहले केवल 15.3 प्रतिशत भारतीय निर्यात को ही शून्य शुल्क का लाभ मिलता था। नए प्रावधानों के चलते भारतीय उत्पादों की कीमतें ओमानी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को मजबूती देता है, जिसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को नए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार बढ़ाना और आर्थिक समृद्धि को नई गति देना है।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, ओमान में वर्तमान में 5 प्रतिशत आयात शुल्क वाले लगभग 3.64 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात उत्पाद अब अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। इससे भारतीय कंपनियों और छोटे व्यापारियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी। विशेष रूप से लौह एवं इस्पात, वस्त्र, चमड़ा, ऑटो कंपोनेंट्स और औद्योगिक उपकरण जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्यम कार्यरत हैं, जो रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान को वस्त्र निर्यात बढ़ने से देश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों को नई ऊर्जा मिलेगी। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ सकता है। इसके साथ ही बुनकरों, हस्तशिल्प कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों से जुड़े लाखों लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय मांग में वृद्धि होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निर्यात आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी।
सीईपीए के तहत भारत के कई प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पूर्ण शुल्क छूट प्रदान की गई है। इनमें रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र शामिल हैं। इस कदम से इन उद्योगों की लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी और भारतीय कंपनियों को ओमान समेत खाड़ी क्षेत्र के अन्य बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
समझौते के तहत भारत अपनी कुल शुल्क श्रेणियों में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश कर रहा है, जो मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि सरकार ने घरेलू हितों को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना, चांदी, आभूषण, जूते, खेल सामग्री तथा कुछ आधार धातुओं का स्क्रैप शामिल है। सरकार का कहना है कि इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आज से लागू हो गया है। इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बाद अगले तीन वर्षों में ओमान को भारत के वस्तु निर्यात में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य पिछले वर्ष के 4.06 अरब डॉलर के निर्यात को बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाना है, जबकि मध्यम अवधि में इसे 10 अरब डॉलर तक ले जाने की योजना है।
समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) की सुविधा दी है। इससे भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा। जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे विशेष फायदा मिलने की संभावना है। वहीं भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों में से 77.79 प्रतिशत पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि भारत ने डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी के आभूषण और कुछ अन्य संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखकर घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से केवल वस्तु निर्यात ही नहीं बल्कि सेवा क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। ओमान का 12.52 अरब डॉलर का सेवा आयात बाजार भारतीय आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेशेवर सेवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत फिलहाल अमेरिका समेत कई देशों के साथ भी ऐसे व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
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