Textile Investment India: केंद्र सरकार ने देश के टेक्सटाइल सेक्टर को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव पीएलआई स्कीम (PLI Scheme) के तीसरे चरण के तहत 22 नई कंपनियों के आवेदनों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से टेक्सटाइल उद्योग में 2,339.14 करोड़ रुपये के नए निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार का अनुमान है कि इस निवेश से 36 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंजूरी प्राप्त इन परियोजनाओं से नोटिफाइड टेक्सटाइल उत्पादों के क्षेत्र में 15,561.34 करोड़ रुपये का अतिरिक्त टर्नओवर उत्पन्न होने की संभावना है। साथ ही टेक्सटाइल वैल्यू चेन में 36,217 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नई स्वीकृतियों के बाद टेक्सटाइल पीएलआई स्कीम के तहत शामिल कंपनियों की कुल संख्या बढ़कर 96 हो गई है। इन सभी कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से 12,822.67 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया है। सरकार का अनुमान है कि इन निवेशों के परिणामस्वरूप कुल 58,294.18 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया जा सकेगा, जो देश के टेक्सटाइल उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंजूरी प्राप्त कंपनियां मुख्य रूप से मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ) पर आधारित परिधान, एमएमएफ फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ये वे क्षेत्र हैं जिनमें वैश्विक स्तर पर मांग तेजी से बढ़ रही है और जहां भारत के लिए निर्यात विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।

सरकार लंबे समय से पारंपरिक टेक्सटाइल उत्पादों के साथ-साथ वैल्यू-एडेड और हाई-टेक टेक्सटाइल उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। टेक्निकल टेक्सटाइल का उपयोग स्वास्थ्य, रक्षा, ऑटोमोबाइल, निर्माण, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पीएलआई स्कीम के माध्यम से इन उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहन देना भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक मजबूत स्थिति दिला सकता है।
केंद्र सरकार का मानना है कि पीएलआई योजना ने उद्योग जगत का भरोसा जीतने में सफलता हासिल की है। तीसरे चरण में भी बड़ी संख्या में कंपनियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि उद्योग जगत सरकार की नीतियों को सकारात्मक रूप से देख रहा है और निवेश के लिए भारत को आकर्षक गंतव्य मान रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह योजना केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात को बढ़ावा देना भी है। इसके जरिए देश में आधुनिक उत्पादन इकाइयों की स्थापना, नई तकनीकों का उपयोग और कुशल मानव संसाधन का विकास संभव होगा।
पीएलआई स्कीम प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस योजना के माध्यम से सरकार विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भारतीय उद्योगों को तैयार करने का प्रयास कर रही है। टेक्सटाइल उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में से एक है और इस क्षेत्र में बढ़ता निवेश लाखों परिवारों की आजीविका को मजबूत करने में सहायक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल क्षेत्र में होने वाला यह निवेश भारत को केवल उत्पादन केंद्र ही नहीं बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल नवाचार और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है। सरकार और उद्योग के बीच यह साझेदारी भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए दीर्घकालिक विकास का आधार बन रही है।
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