ऑनलाइन खाना अब और महंगा! Swiggy ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, Zomato के बाद यूजर्स पर महंगाई का डबल झटका

खबर सार :-
स्विगी और जोमैटो द्वारा प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाना फूड डिलीवरी सेक्टर के बदलते बिजनेस मॉडल को दर्शाता है, जहां कंपनियां मुनाफे पर फोकस कर रही हैं। हालांकि इससे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है, लेकिन सुविधा की वजह से मांग बनी रह सकती है। आगे चलकर कीमतों और शुल्क में और बदलाव संभव हैं, जिससे उपभोक्ताओं को खर्च की रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

ऑनलाइन खाना अब और महंगा! Swiggy ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, Zomato के बाद यूजर्स पर महंगाई का डबल झटका
खबर विस्तार : -

Online Food Ordering Charges: ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के लिए एक और झटका सामने आया है। Swiggy ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे अब हर ऑर्डर पर उपभोक्ताओं को पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। इससे पहले Zomato भी फीस बढ़ा चुका है, जिससे फूड डिलीवरी महंगी होती जा रही है। स्विगी ऐप पर दिखाई गई नई दरों के अनुसार, प्लेटफॉर्म फीस अब 14.99 रुपये से बढ़कर 17.58 रुपये (जीएसटी सहित) प्रति ऑर्डर हो गई है। यानी प्रति ऑर्डर लगभग 2.59 रुपये का इजाफा किया गया है।

क्यों बढ़ी प्लेटफॉर्म फीस?

कंपनी का कहना है कि यह बढ़ोतरी प्लेटफॉर्म के संचालन, टेक्नोलॉजी में निवेश और सर्विस क्वालिटी बनाए रखने के लिए की गई है। फूड डिलीवरी कंपनियों का तर्क है कि बढ़ती लागत-जैसे डिलीवरी, टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और सपोर्ट सिस्टम को संतुलित करने के लिए फीस बढ़ाना जरूरी हो गया है। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कंपनियों के मुनाफे को सुधारने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक डिस्काउंट और कैशबैक के सहारे ग्राहकों को जोड़ने के बाद अब कंपनियां राजस्व बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं।

सिर्फ प्लेटफॉर्म नहीं, पूरा इकोसिस्टम प्रभावित

प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पहले से ही लागत के दबाव में है। हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि से खाना बनाने की लागत बढ़ी है। इसका असर मेन्यू प्राइस पर भी पड़ रहा है। इस तरह ग्राहक अब रेस्टोरेंट के बढ़े हुए रेट, डिलीवरी चार्ज और अब बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म फीस समेत कुल तीन तरफ से कीमतों का दबाव झेल रहे हैं।

Zomato food Delivery Charges-Online Food Ordering

Zomato ने भी कुछ दिनों पूर्व बढ़ाया था शुल्क

स्विगी से पहले Zomato ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में करीब 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। कंपनी ने फीस को 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये (जीएसटी से पहले) कर दिया था, जो टैक्स सहित लगभग 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर बैठती है। इससे साफ है कि दोनों प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियां अब एक समान रणनीति पर काम कर रही हैं, जहां धीरे-धीरे यूजर्स से अतिरिक्त शुल्क लेकर अपनी कमाई बढ़ाई जा रही है।

क्या ऑनलाइन फूड मंगाने वाले ग्राहकों की आदत बदलेगी?

लगातार बढ़ती फीस से सवाल उठने लगा है कि क्या ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर कम कर देंगे? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि छोटे ऑर्डर पर फीस का असर ज्यादा दिखेगा, जिससे लोग या तो बड़े ऑर्डर करेंगे या सीधे रेस्टोरेंट से खरीदारी को प्राथमिकता दे सकते हैं। हालांकि, मेट्रो शहरों में सुविधा और समय की बचत के कारण फूड डिलीवरी की मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।

शेयर बाजार पर दिख रहा असर

फीस बढ़ोतरी के बीच स्विगी के शेयरों में हल्की तेजी देखने को मिली। दोपहर 12:30 बजे कंपनी का शेयर करीब 2.55 प्रतिशत बढ़कर 279.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, लंबी अवधि में तस्वीर उतनी सकारात्मक नहीं है। पिछले एक सप्ताह में शेयर 5 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है, जबकि एक महीने में इसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। पिछले छह महीनों में शेयर 36 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है, जो निवेशकों की चिंताओं को दर्शाता है।

बिजनेस मॉडल में बदलाव के संकेत

फूड डिलीवरी कंपनियों का बिजनेस मॉडल अब तेजी से बदल रहा है। पहले जहां कंपनियां डिस्काउंट और ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करती थीं, वहीं अब वे स्थिर और लाभकारी मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। प्लेटफॉर्म फीस में लगातार बढ़ोतरी इसी दिशा में एक बड़ा संकेत है। आने वाले समय में यह फीस और भी बढ़ सकती है या फिर कंपनियां अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग चार्ज लागू कर सकती हैं।

देश में स्विगी और जोमैटो प्लेटफॉर्म की स्थिति

भारत में फूड डिलीवरी इंडस्ट्री का स्केल बहुत बड़ा हो चुका है। Swiggy और Zomato मिलकर हर महीने 15 लाख से ज्यादा डिलीवरी पार्टनर्स के जरिए सेवाएं देते हैं। यह संख्या बदलती रहती है क्योंकि गिग मॉडल में लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन यह सेक्टर देश के सबसे बड़े अनौपचारिक रोजगार स्रोतों में शामिल हो चुका है। आंकड़ों पर गौर करें तो, Swiggy के साथ औसतन करीब 6.9 लाख (6.91 लाख) मासिक एक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स जुड़े हैं। जबकि, Zomato (Blinkit सहित) करीब 8.94 लाख मासिक एक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स हैं। इस तरह दोनों कंपनियों को मिलाकर 1.5 मिलियन से ज्यादा डिलीवरी वर्कर्स हर महीने सक्रिय रहते हैं। Swiggy के अनुसार, एक साल में करीब 25 लाख लोग किसी न किसी समय प्लेटफॉर्म से जुड़े रहे। Zomato के CEO आदित्य मंगला के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर हर महीने 7–8 लाख एक्टिव डिलीवरी पार्टनर्स काम करते हैं। यह वर्कफोर्स “फुल-टाइम कर्मचारी” नहीं बल्कि गिग वर्कर्स (पार्टनर मॉडल) पर आधारित है।

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