West Bengal में कारोबार की नई उम्मीद: निवेश, उद्योग और रोजगार को लेकर बढ़ा भरोसा

खबर सार :-
कैट के बयान ने पश्चिम बंगाल में व्यापार और उद्योग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। संगठन का मानना है कि निवेशक-अनुकूल नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा और पारदर्शी शासन राज्य को दोबारा औद्योगिक विकास की राह पर ला सकते हैं। यदि एमएसएमई, पारंपरिक उद्योगों और स्टार्टअप्स को पर्याप्त समर्थन मिलता है, तो पश्चिम बंगाल आने वाले वर्षों में रोजगार और कारोबार का बड़ा केंद्र बन सकता है।

West Bengal में कारोबार की नई उम्मीद: निवेश, उद्योग और रोजगार को लेकर बढ़ा भरोसा
खबर विस्तार : -

West Bengal business growth: अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने पश्चिम बंगाल को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यदि राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सोच के अनुरूप पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल शासन व्यवस्था स्थापित होती है, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। संगठन का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

कैट के सचिव और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के व्यापारी और औद्योगिक समुदाय में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने की संभावना को लेकर नया विश्वास पैदा हुआ है। उनके अनुसार, कारोबारी वर्ग अब ऐसी सरकार चाहता है जो उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करे और व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करे।

15 वर्षों में उद्योगों को झेलनी पड़ीं कई चुनौतियां

प्रवीण खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि बीते डेढ़ दशक में पश्चिम बंगाल में नीतिगत अस्थिरता, निवेशकों के घटते भरोसे, सिंडिकेट संस्कृति और प्रशासनिक दबाव के कारण व्यापार और उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), पारंपरिक उद्योगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल कभी देश के सबसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों में गिना जाता था, लेकिन अब निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है। हजारों एमएसएमई इकाइयां या तो बंद हो चुकी हैं या फिर दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।

पारंपरिक उद्योगों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

कैट ने दावा किया कि बंगाल के कई पारंपरिक उद्योग लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई उद्योग जैसे क्षेत्रों में लाखों लोग काम करते हैं, लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और कमजोर बुनियादी ढांचे ने इन उद्योगों की स्थिति को कमजोर किया है। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि छेना आधारित मिठाइयों पर लगाए गए जीएसटी ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई उद्योग पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। उनका कहना है कि यदि इन उद्योगों को उचित नीतिगत संरक्षण और कर राहत मिले, तो ये फिर से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित कर सकते हैं।

व्यापारियों की मांग-‘सरल नियम और निवेशक-अनुकूल माहौल’

कैट के कार्यकारी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के उद्योगपति सुभाष अग्रवाल ने कहा कि राज्य का कारोबारी समुदाय ऐसी औद्योगिक नीतियों की अपेक्षा कर रहा है जो ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ जैसी पहलों के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि उद्योगपति और व्यापारी बिजली दरों में राहत, सरल नियम, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम और एमएसएमई व स्टार्टअप्स के लिए मजबूत सहायता चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि इन क्षेत्रों में सुधार किए जाते हैं तो पश्चिम बंगाल दोबारा औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गलियारों पर जोर

सुभाष अग्रवाल ने बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, आधुनिक औद्योगिक गलियारों और पारंपरिक कारीगरों को संरक्षण देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत किए बिना उद्योगों का तेजी से विकास संभव नहीं है। वहीं, कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि पश्चिम बंगाल के व्यापारी यह मानते हैं कि मजबूत नेतृत्व और विकास-केंद्रित शासन राज्य को फिर से व्यापार, निर्यात, विनिर्माण और रोजगार सृजन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।

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