America Iran deal Crude oil prices: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक समय करीब 10 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार को उम्मीद है कि यदि समझौता हो जाता है तो होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय से बनी रुकावट और संघर्ष की आशंका कम हो जाएगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है।
अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) शुरुआती कारोबार में लगभग 10 प्रतिशत तक टूट गया। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी देखने को मिली और यह करीब 94.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी करीब 7 प्रतिशत गिरकर 102.14 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इस घटना के बाद कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावनाओं को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में यह नरमी अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के बाद देखने को मिली। एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि वॉशिंगटन और तेहरान एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस समझौते का उद्देश्य फरवरी के आखिर से जारी टकराव को समाप्त करना बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 48 घंटों में इस दिशा में बड़ी प्रगति हो सकती है। यही वजह रही कि निवेशकों ने तेजी से तेल की खरीद कम की और कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस घटनाक्रम पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोक रहा है। यह नौसैनिक अभियान हाल ही में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अभियान के बाद ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी नौसेना को निशाना बनाने की कोशिशें भी हुई थीं। ऐसे में दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन अब स्थितियां बदली नजर आ रही हैं।
ट्रंप की चेतावनी- समझौता नहीं तो फिर होगी बमबारी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान पहले से तय शर्तों को मान लेता है तो यह संघर्ष समाप्त हो सकता है और होर्मुज स्ट्रेट सभी देशों के लिए खुला रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे ईरान को भी फायदा होगा। हालांकि ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है और पहले से कहीं ज्यादा बड़े स्तर पर हमले किए जा सकते हैं। इस बयान के बाद वैश्विक बाजार में सतर्कता भी बढ़ गई है।

अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते के कारण भले ही तेल बाजार में राहत देखने को मिली हो, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे कई जहाजों को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से चेतावनी दी गई कि समुद्री रास्ता अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन करोड़ों बैरल तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों को प्रभावित करता है।
इस बीच चीन ने भी कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से मुलाकात की। इस बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव कम करने पर चर्चा हुई। चीन दुनिया में ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। इसलिए बीजिंग की चिंता यह है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और चीन की अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर आम लोगों पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के हफ्तों में अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। फिलहाल अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.54 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि डीजल की कीमत 5.67 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौता सफल रहता है और तेल आपूर्ति सामान्य होती है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।
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