नई दिल्लीः दुनिया भर में इंटरनेट और मोबाइल फोन इंसान की सबसे बड़ी जरूरत बनते जा रहे हैं। अब हमारी दैनिक जीवन से जुड़ी अनेकों गतिविधियां और ऑफिस से जुड़े काम इंटरनेट और मोबाइल फोन के बिना हो पाना असंभव सा लगता है। सरकार की ओर से पेश ताजा आंकड़ों पर गौर करें, तो भारत में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या जनवरी में बढ़कर 94.5 करोड़ तक पहुंच गई है, जो कि दिसंबर में 94.4 करोड़ थी। ब्रॉडबैंड सेगमेंट में वायर्ड और वायरलेस दोनों तरह के यूजर्स शामिल हैं। सब्सक्राइबर्स की संख्या में मामूली वृद्धि मुख्य रूप से मोबाइल ब्रॉडबैंड यूजर्स के कारण हुई है, जो कि दिसंबर में 89.8 करोड़ से बढ़कर 89.9 करोड़ हो गई है।
सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक देश की शीर्ष पांच ब्रॉडबैंड (वायर्ड और वायरलेस) कंपनियों के पास 98.43 प्रतिशत मार्केट शेयर है। इनमें भारती एयरटेल के पास 28.9 करोड़ यूजर्स हैं। वोडाफोन आइडिया के पास 12.6 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। बीएसएनएल और एट्रिया कन्वर्जेंस टेक्नोलॉजीज के पास क्रमशः 3.57 करोड़ और 22 लाख ग्राहक हैं। वायर्ड सेगमेंट की बात करें, तो एयरटेल के पास 85 लाख और बीएसएनएल के पास 42 लाख ग्राहक हैं। एट्रिया के पास 22 लाख सब्सक्राइबर्स और केरल विजन ब्रॉडबैंड के 12 लाख यूजर्स हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन पांचों कंपनियों के पास संयुक्त रूप से फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट में 67.67 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है।
मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन में अलग-अलग रुझान देखने को मिले हैं। आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2024 में मोबाइल ब्रॉडबैंड सब्सक्रिप्शन की संख्या 89.8 करोड़ से बढ़कर जनवरी में 89.9 करोड़ हो गई है। समीक्षा अवधि के दौरान फिक्स्ड वायरलेस ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या 49 लाख थी। टेलीकॉम रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) ग्राहक, जिन्हें पहले वायरलाइन के अंतर्गत गिना जाता था, अब वायरलेस कैटेगरी में शामिल कर दिए गए हैं। इससे कुल वायरलेस यूजर्स की संख्या में वृद्धि हुई, जो दिसंबर 2024 में 115.06 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2025 में 115.7 करोड़ हो गई। इसके अलावा, जनवरी में 1.41 करोड़ से अधिक यूजर्स ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) के विकल्प को चुना, जिससे सुविधा शुरू होने के बाद से एमएनपी अनुरोधों की कुल संख्या 109.33 करोड़ तक पहुंच गई है।
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