मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक की नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को मजबूत पूंजी भंडार, कम गैर-निष्पादित ऋण और मजबूत आय से समर्थन मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार की प्रक्रिया अभी भी जारी रखी है। इस समय जीएनपीए अनुपात और एनएनपीए अनुपात कई दशकों के निचले स्तर तक पहुंच गये हैं, जिसमें जीएनपीए का आंकड़ा 2.3 प्रतिशत और एनएनपीए का 0.5 प्रतिशत तक आ गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार बैंकों का कुल सकल एनपीए यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां आधार अंकों में 5 प्रतिशत तक कम हो गयी हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में समान अवधि में यह आंकड़ा 2.8 प्रतिशत था, जो कि वर्ष 2025 में 31 मार्च तक घटकर कुल ऋणों का 2.3 प्रतिशत हो गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसबी ने एनपीए में भारी गिरावट दर्ज की है, जो कि मार्च 2024 में 3.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल मार्च 2025 में आंकड़ा घटकर 2.8 प्रतिशत हो गया है। निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 2.8 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है। इसके अलावा, मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट के नतीजों से स्पष्ट होता है कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल पूंजी स्तर प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों में भी रेग्युलेटरी दर न्यूनतम से ऊपर ही रहेगा।
वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भारतीय वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना रहा। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार करते हुए अपनी पूंजी और तरलता बफर को मजबूत किया। बैंक ऋण वृद्धि में नरमी आई और यह जमा वृद्धि के करीब पहुंच गई, जिससे दोनों के बीच का अंतर कम हो गया। एनबीएफसी द्वारा ऋण विस्तार को बेहतर ऋण गुणवत्ता और मजबूत पूंजी बफर द्वारा समर्थित किया गया। मौद्रिक नीति में ढील के कारण अनुकूल ब्याज दर के माहौल से भविष्य में ऋण उठाव को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्र के सहकारी बैंकों यानी यूसीबी की पूंजी स्थिति पहले की अपेक्षा काफी मजबूत हुई है, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की पूंजी स्थिति रेग्युलेटरी दर में न्यूनतम से काफी ऊपर है। आंकड़ों में जीवन और गैर-जीवन दोनों बीमा क्षेत्रों की समेकित शोधन क्षमता का अनुपात न्यूनतम निर्धारित सीमा से ऊपर ही रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अर्ध-वार्षिक स्लिपेज का अनुपात 0.7 प्रतिशत पर स्थिर रहा है, जबकि बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात मार्च 2025 में 76.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो कि सितंबर 2024 की तुलना में आंशिक रूप से कम है।
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