NSE Report GDP Growth: वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग के चलते देश की जीडीपी वृद्धि दर करीब 7.8 प्रतिशत बनी हुई है। यह आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये की स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
एनएसई के मुताबिक, फरवरी में निफ्टी 50 में 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं मार्च में 1 से 13 तारीख के बीच साल-दर-साल 11.4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, इस उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया। फरवरी में घरेलू निवेशकों ने 38,423 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, जो लगातार 31वें महीने जारी खरीदारी को दर्शाता है। इसे 29,845 करोड़ रुपये के एसआईपी इनफ्लो का समर्थन मिला। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों ने पहले कुछ समय खरीदारी की, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के बिगड़ने पर फिर से बिकवाली शुरू कर दी।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। निफ्टी 50 और अन्य व्यापक बाजारों में कंपनियों ने दोहरे अंकों में आय वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि त्योहारी मांग, ऋण मांग और बेहतर रिकवरी के चलते संभव हुई है। निफ्टी 50 कंपनियों से बाहर भी विभिन्न सेक्टरों में मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक आधार को मजबूत बनाती है।
एनएसई की ‘मार्केट प्लस’ रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में आईपीओ गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। इस दौरान 99 मेनबोर्ड कंपनियों ने आईपीओ के जरिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक है। फंड जुटाने के मामले में फाइनेंशियल सेक्टर सबसे आगे रहा है, जिसकी कुल हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही। इसके बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर (31%) और इंडस्ट्रियल सेक्टर (11%) का स्थान रहा।
हालांकि, एसएमई सेगमेंट में आईपीओ गतिविधियों में कमी देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में 105 एसएमई आईपीओ के जरिए 5,121 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले कम है। इस सेगमेंट में इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी रहा।
एनएसई के अनुसार, फरवरी 2026 तक पंजीकृत निवेशकों की संख्या बढ़कर 12.8 करोड़ हो गई है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़े हैं। राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ यूनिक निवेशकों के साथ शीर्ष पर है और कुल निवेशक आधार में 15.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान मिलकर कुल निवेशकों का 48 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
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