सेवा और उत्पादन क्षेत्र ने बदली निवेश की तस्वीर, 2025 में एफडीआई में 73 प्रतिशत की रिकॉर्ड छलांग: यूएनसीटीएडी

खबर सार :-
यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट से साफ है कि 2025 में भारत विदेशी निवेश के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभरा है। सेवा, उत्पादन, एआई और डाटा सेंटर्स में भारी निवेश ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। हालांकि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर है, फिर भी भारत की विकास गाथा विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती रहेगी।

सेवा और उत्पादन क्षेत्र ने बदली निवेश की तस्वीर, 2025 में एफडीआई में 73 प्रतिशत की रिकॉर्ड छलांग: यूएनसीटीएडी
खबर विस्तार : -

FDI Investment 2025: वर्ष 2025 भारत के लिए विदेशी निवेश के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 73 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां भारत में कुल 47 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा तेजी से उछल गया। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र और उत्पादन (मैन्युफैक्चरिंग) में बड़े निवेश के कारण संभव हो पाई है।

वित्तीय सेवाएं और आईटी बने निवेश के बड़े केंद्र

यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेश में आई इस तेजी का सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का रहा। इसमें वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), डिजिटल सेवाएं और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे। वैश्विक कंपनियों ने भारत को न सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता बाजार माना, बल्कि तकनीक और इनोवेशन के केंद्र के रूप में भी देखा।

उत्पादन क्षेत्र को सरकारी नीतियों का सहारा

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पादन क्षेत्र में भी विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह भारत सरकार की वे नीतियां रहीं, जिनका उद्देश्य देश को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ना है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)’ जैसी योजनाओं ने विदेशी निवेशकों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आकर्षित किया।

दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते निवेश गंतव्यों में भारत

यूएनसीटीएडी ने भारत को विदेशी निवेश वृद्धि दर के मामले में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल बताया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत निवेशकों के भरोसे पर खरा उतरा है।

डाटा सेंटर्स में भारत की मजबूत मौजूदगी

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर के नवीनतम अंक के अनुसार, वर्ष 2024 के पहले तीन तिमाहियों में भारत में डाटा सेंटर्स में कुल 7 अरब डॉलर का निवेश हुआ। इस दौरान डाटा सेंटर्स में निवेश पाने वाले देशों की सूची में भारत सातवें स्थान पर रहा। हालांकि, चौथी तिमाही में इस क्षेत्र में निवेश में अचानक तेज उछाल आया, जिसने भारत को वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित कर दिया।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन के बड़े दांव

रिपोर्ट में बताया गया कि अक्टूबर में गूगल ने आंध्र प्रदेश में एआई हब स्थापित करने के लिए 15 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। इसके बाद दिसंबर में माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में एआई, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डाटा सेंटर्स के लिए 17.5 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया। वहीं अमेजन ने भी एआई और अन्य क्षेत्रों में 35 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ये सभी निवेश अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे।

वैश्विक एफडीआई में भी दिखी बढ़त

वैश्विक स्तर पर देखें तो वर्ष 2024 में दुनिया भर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल एफडीआई बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2025 के औद्योगिक रुझान यह संकेत देते हैं कि डाटा सेंटर्स अब वैश्विक निवेश को दिशा दे रहे हैं। नए निवेश प्रोजेक्ट्स के कुल मूल्य का लगभग पांचवां हिस्सा केवल डाटा सेंटर्स से जुड़ा रहा।

एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर में उछाल

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल नेटवर्क की बढ़ती मांग के चलते इस क्षेत्र में घोषित निवेश 270 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर उद्योग भी तेजी से उभरने वाला क्षेत्र साबित हुआ, जहां हाल ही में घोषित परियोजनाओं के मूल्य में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, जिन क्षेत्रों पर शुल्क और व्यापारिक जोखिम का असर पड़ा, वहां निवेश परियोजनाओं की संख्या में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। इनमें वस्त्र उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे।

विकसित देशों में बढ़ा निवेश, भारत रहा अपवाद

यूएनसीटीएडी के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक विदेशी निवेश विकसित देशों में गया, जहां कुल निवेश 43 प्रतिशत बढ़कर 728 अरब डॉलर हो गया। इसके विपरीत, विकासशील देशों में एफडीआई 2 प्रतिशत घटकर 877 अरब डॉलर रह गया। इस परिदृश्य में भारत एक अपवाद के रूप में उभरा, जहां निवेश में मजबूत वृद्धि देखने को मिली।  रिपोर्ट में बताया गया कि चीन में लगातार तीसरे वर्ष विदेशी निवेश में गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2025 में चीन में एफडीआई 8 प्रतिशत घटकर 107.5 अरब डॉलर रह गया, हालांकि निवेश का बड़ा हिस्सा रणनीतिक और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में केंद्रित रहा।

निवेशकों का भरोसा अभी भी कमजोर

यूएनसीटीएडी ने आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि केवल ऊपरी आंकड़ों में दिख रही वृद्धि पूरी सच्चाई नहीं बताती। नीति निर्माताओं को धन के प्रवाह के साथ-साथ वास्तविक निवेश बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय विलय और अधिग्रहण के मूल्य में 10 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि परियोजना वित्त पोषण लगातार चौथे साल घटा है।

 

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