Middle East Tension से चमका Gold-Silver: निवेशकों ने जोखिम से बनाई दूरी, सुरक्षित निवेश पर जोर

खबर सार :-
मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जिससे सोना और चांदी मजबूत बने हुए हैं। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की नीतियां कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा तय करेंगी।

Middle East Tension से चमका Gold-Silver: निवेशकों ने जोखिम से बनाई दूरी, सुरक्षित निवेश पर जोर
खबर विस्तार : -

Middle East Tension Gold Silver Rate: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को कारोबारी सत्र के दौरान कीमती धातुओं-सोना और चांदी-की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और संभावित ऊर्जा संकट की आशंका के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों यानी सेफ हेवनकी ओर रुख किया। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी की कीमतों को मिला। 

आज सुबह करीब 10:39 बजे तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 1,072 रुपये यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,60,745 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता देखा गया। वहीं, मई डिलीवरी वाली चांदी में इससे भी ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह 5,333 रुपये यानी 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ 2,67,524 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में भी सोने और चांदी के भाव ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे। उस समय एमसीएक्स पर अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 1,61,525 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि मई एक्सपायरी वाली चांदी 2,65,560 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर सेटल हुई थी। हालांकि शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ही दोनों धातुओं में नई तेजी देखने को मिली।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हो गई है। ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों में संभावित बाधा का मतलब है कि आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि निवेशक जोखिम भरे निवेश जैसे इक्विटी और क्रिप्टो से दूरी बनाकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

Gold-Silver Price

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी

वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं के दाम मजबूत बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी 84.11 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती देखी गई, जबकि सोना 12.60 डॉलर यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,153.91 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में यह तेजी सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है।

बाजार विशेषज्ञों की राय

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, हाल के दिनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद बाजार में कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली थी। इसी कारण सोने के भाव में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी। उन्होंने बताया कि यूएस डॉलर इंडेक्स में मजबूती और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल में बदलाव ने भी सोने की कीमतों पर कुछ दबाव बनाया। हालांकि, इन कारकों के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है।

संघर्ष से बढ़ी अनिश्चितता

मिडिल ईस्ट की स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबर सामने आई कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया। इसके जवाब में ईरान की ओर से क्षेत्र के कई देशों की दिशा में मिसाइल हमले किए जाने की खबरें भी सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों में ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इन घटनाओं ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंच सकता है।

MCX Gold

निवेशकों की रणनीति में बदलाव

ऐसे माहौल में निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। सोना और चांदी पारंपरिक रूप से ऐसे समय में सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, इसलिए बाजार में इनकी मांग बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक टिप्पणियों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है। हाल ही में ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका के साथ सकारात्मक समझौता होता है तो वह सैन्य हमलों में कमी पर विचार कर सकता है।

मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों का असर

सोने की कीमतों पर केवल भू-राजनीतिक तनाव ही नहीं बल्कि कई आर्थिक कारक भी असर डाल रहे हैं। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीतिगत ढील, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव, वैश्विक तरलता की स्थिति और ऊर्जा बाजार में तेजी शामिल हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भी बाजार में महंगाई की आशंका को बढ़ा रही हैं, जिससे निवेशक सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करना पसंद कर रहे हैं।

आर्थिक आंकड़ों पर नजर

आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार शुरुआती बेरोजगारी दावे 2.13 लाख दर्ज किए गए, जो पिछले सप्ताह के बराबर हैं और बाजार के अनुमान 2.15 लाख से थोड़े बेहतर हैं। अब निवेशकों की नजर आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है, जिनमें यूरोपीय संघ का जीडीपी डेटा, अमेरिका की रिटेल सेल्स, फैक्ट्री ऑर्डर्स और श्रम बाजार से जुड़े अन्य संकेतक शामिल हैं। इन आंकड़ों से यह तय होगा कि आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों की दिशा क्या हो सकती है।

अन्य प्रमुख खबरें