भारत-फिनलैंड साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान, EU-India FTA से दोगुना हो सकता है व्यापार: एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम
खबर सार :-
फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम के बयान से स्पष्ट है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था और सतत विकास के केंद्र में तेजी से उभर रहा है। प्रस्तावित ईयू-इंडिया एफटीए, सर्कुलर इकोनॉमी और रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई दे सकते हैं। इससे व्यापार, निवेश, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्र में व्यापक अवसर पैदा होने की संभावना है।
खबर विस्तार : -
EU India FTA growth 2026: भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और सतत विकास आधारित सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने मंगलवार को कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है और वैश्विक विकास में इसकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
हॉलस्ट्रॉम ने आईएनएस न्यूज एजेंसी के साथ खास बातचीत में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल की आवश्यकता है। ऐसे में सर्कुलर इकोनॉमी एक महत्वपूर्ण अवधारणा बनकर उभरी है, जो संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड इस क्षेत्र में स्वाभाविक साझेदार हैं क्योंकि दोनों देश सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं और समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
महावाणिज्यदूत ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और फिनलैंड मिलकर इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।
एफटीए पर बातचीत पूरी, लागू करने की प्रक्रिया जारी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित एफटीए पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने बताया कि समझौते पर बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसे लागू करने की प्रक्रियाएं चल रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे बड़ा लाभ होगा। उनके अनुसार, एफटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना तक बढ़ सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
निवेश, उद्योग और व्यापार की अपार संभावनाएं
महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। उन्होंने महाराष्ट्र को देश का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक राज्य बताते हुए कहा कि यहां निवेश, उद्योग और व्यापार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की विशेष रुचि महाराष्ट्र में रहती है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई महत्वपूर्ण सहयोगी परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुंबई के ऐतिहासिक ससून डॉक के विकास और आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में भी फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह सहयोग दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का प्रतीक है।
आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी गति
हॉलस्ट्रॉम ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच दावोस में दो बार महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास, स्वच्छ तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष भविष्य में इन क्षेत्रों में और अधिक सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
विज्ञान, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, व्यापार को नई दिशा
भारत और फिनलैंड के द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए महावाणिज्यदूत ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी विश्वास, सहयोग और साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति स्टब ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। उनके अनुसार यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में विज्ञान, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, व्यापार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और फिनलैंड मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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