Indian Stock Market: कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए, हालांकि आईटी सेक्टर में आई तेजी ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,015.90 के मुकाबले 356.91 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,658.99 पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी भी अपने पिछले बंद 24,765.90 से 109.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 24,656.40 पर खुला। खबर लिखे जाने तक सुबह करीब 9.30 बजे सेंसेक्स 316.09 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79,699.81 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 86.60 अंक यानी 0.35 प्रतिशत टूटकर 24,679.30 पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि व्यापक बाजार सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.48 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा। इससे संकेत मिलता है कि मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी सेक्टर सबसे आगे रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 1.23 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। डॉलर की मजबूती और वैश्विक टेक कंपनियों से जुड़े सकारात्मक संकेतों के कारण आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत ऑटो, बैंकिंग और एफएमसीजी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 0.60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी बैंक इंडेक्स लगभग 0.85 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा। एफएमसीजी सेक्टर में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। बाजार के लिए एक अहम तथ्य यह भी रहा कि पिछले कारोबारी सत्र में 05 मार्च को घरेलू बाजार ने लगातार चार दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए मजबूत वापसी की थी। उस दिन सेंसेक्स 899.71 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 80,015.90 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 285.40 अंक यानी 1.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,765.90 के स्तर पर बंद हुआ था।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,550 से 24,500 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। अगर बाजार इस स्तर से नीचे जाता है तो दबाव और बढ़ सकता है। वहीं 24,850 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस के रूप में सामने आ रहा है। टेक्निकल संकेतकों की बात करें तो रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) फिलहाल 37.55 पर है। यह स्तर ओवरसोल्ड जोन से थोड़ा ऊपर है और संकेत देता है कि बाजार में धीरे-धीरे रिकवरी की संभावना बन सकती है।

संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। पिछले सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार पांचवें सत्र में बिकवाली जारी रखते हुए करीब 3,752 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। डीआईआई ने लगातार सातवें दिन खरीदारी जारी रखते हुए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। इसके अलावा विशेषज्ञों का कहना है कि नई खरीदारी की रणनीति तब बनानी चाहिए जब निफ्टी 25,000 के स्तर के ऊपर स्पष्ट और मजबूत ब्रेकआउट दे। ऐसा होने पर बाजार में तेजी की धारणा मजबूत हो सकती है और एक स्थायी बुलिश ट्रेंड बनने की संभावना बढ़ जाएगी।
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