RBI Report 2026: दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि भारत आने वाले समय में भी विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सुधारों के कारण देश की विकास संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।
आरबीआई ने अपने मासिक बुलेटिन में कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में निर्यात का तेजी से विविधीकरण किया है, जिससे बाहरी जोखिमों का प्रभाव काफी हद तक कम हुआ है। अब भारत कुछ चुनिंदा बाजारों पर निर्भर न रहकर कई क्षेत्रों में अपने निर्यात का विस्तार कर रहा है। इससे वैश्विक मंदी या क्षेत्रीय संकट की स्थिति में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल रही है।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों और अमेरिका सहित लगभग 50 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 देशों या समूहों के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है। इन वार्ताओं का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना, बाजारों तक बेहतर पहुंच बनाना और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है।
आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले अग्रिम अनुमान यह संकेत देते हैं कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। दिसंबर के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतक यह दर्शाते हैं कि विकास की रफ्तार में निरंतर तेजी आ रही है और मांग की स्थिति भी सकारात्मक बनी हुई है।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन यह निर्धारित सहनशील सीमा के भीतर रही। साथ ही, पिछले एक वर्ष में वाणिज्यिक क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों का प्रवाह बढ़ा है। इसमें बैंकिंग और गैर-बैंकिंग दोनों स्रोतों का अहम योगदान रहा है, जिससे निवेश गतिविधियों को गति मिली है।
दिसंबर में भारत ने न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार वार्ताएं सफलतापूर्वक संपन्न कीं। इसके अलावा वर्ष 2025 में कई अहम आर्थिक सुधार लागू किए गए, जिनमें कर संरचना का युक्तिकरण, श्रम संहिता का कार्यान्वयन और वित्तीय क्षेत्र का उदारीकरण शामिल है। इन सुधारों से दीर्घकालिक विकास की नींव और मजबूत होने की उम्मीद है।
आरबीआई की ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर रिपोर्ट 2024-25’ के अनुसार, देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत पूंजी भंडार, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और अच्छे मुनाफे के कारण स्थिर बना हुआ है। यह स्थिति आर्थिक गतिविधियों को आवश्यक ऋण सहायता उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो रही है।
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