WEF Davos 2026: विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से यूरोपीय संघ (ईयू) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू संबंधों को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐसे व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं, जिसे “सभी समझौतों की जननी” कहा जा रहा है। यह समझौता न केवल दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार की दिशा भी बदल सकता है।
अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने अमेरिका को भी परोक्ष संदेश दिया कि यूरोप अब टैरिफ की राजनीति से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईयू अब नए और भरोसेमंद साझेदारों के साथ खुले तौर पर सहयोग के लिए आगे बढ़ रहा है। भारत इस रणनीति का केंद्र बिंदु बनकर उभरा है।
ईयू अध्यक्ष ने बताया कि यह संभावित व्यापार समझौता लगभग 2 अरब लोगों के लिए एक साझा बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक जीडीपी का करीब एक चौथाई हिस्सा है। उन्होंने कहा, “हमने कई देशों के साथ समझौते किए हैं, लेकिन भारत के साथ होने वाला यह करार ऐतिहासिक होगा। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम निर्णायक मोड़ पर हैं।”
वॉन डेर लेयेन ने यह भी पुष्टि की कि वह अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगी और 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी मौजूद रहेंगे। गणतंत्र दिवस के बाद दोनों नेता भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे।
ईयू अध्यक्ष के अनुसार, यह व्यापार समझौता यूरोप को आर्थिक और रणनीतिक दोनों रूप से मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक चुनौतियां यूरोप के लिए अवसर बन सकती हैं। रक्षा, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र-तीनों मोर्चों पर यूरोप को तेज़ी से आगे बढ़ना होगा।
सूत्रों के मुताबिक, 27 जनवरी को भारत और ईयू ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच सकते हैं। दोनों पक्ष एक संयुक्त दस्तावेज अपनाएंगे, जिसके बाद इसे कानूनी प्रक्रिया और यूरोपीय संसद व परिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा-रक्षा साझेदारी और ईयू में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की मोबिलिटी बढ़ाने पर भी समझौते संभव हैं।
इस बार गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ की एक सैन्य टुकड़ी भी हिस्सा लेगी। यह भारत-ईयू के बढ़ते रणनीतिक और रक्षा संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत द्वारा अब तक किया गया सबसे बड़ा व्यापार सौदा होगा, क्योंकि इसमें 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं और सेवाओं दोनों को शामिल किया जाएगा। इससे भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
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