India Aviation Sector Growth: भारत का एविएशन सेक्टर अब केवल हवाई यात्राओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक निवेश और एयरक्राफ्ट लीजिंग के बड़े केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने कहा है कि भारतीय एयरलाइंस के पास वर्तमान में 1,640 विमानों की डिलीवरी लंबित है, जिससे अगले 10 वर्षों में लगभग 50 अरब डॉलर का एयरक्राफ्ट लीजिंग अवसर पैदा होगा। उन्होंने यह घोषणा गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट 2.0 के दौरान की। मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन बाजारों में शामिल हो चुका है और अब सरकार देश को ग्लोबल एविएशन फाइनेंसिंग हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत का कमर्शियल विमान बेड़ा 2027 तक बढ़कर 1,100 विमानों तक पहुंच सकता है। वहीं 2035 तक यह संख्या 2,250 से अधिक होने का अनुमान है। यह वृद्धि न केवल यात्रियों की बढ़ती संख्या को दर्शाती है, बल्कि देश में एयरक्राफ्ट फाइनेंसिंग और लीजिंग सेक्टर की बढ़ती संभावनाओं को भी मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि इस बड़े विस्तार को सफल बनाने के लिए भारत को मजबूत घरेलू लीजिंग और फाइनेंसिंग इकोसिस्टम तैयार करना होगा। सरकार लगातार ऐसी नीतियां बना रही है जिससे भारतीय एयरलाइंस को वैश्विक स्तर की वित्तीय सुविधाएं मिल सकें और विदेशी निर्भरता कम हो।
राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार ने पहले आयोजित इंडिया एयरक्राफ्ट लीजिंग एंड फाइनेंसिंग समिट में किए गए कई वादों को पूरा कर दिया है। इसी दिशा में ‘प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स इन एयरक्राफ्ट ऑब्जेक्ट्स एक्ट 2025’ लागू किया गया है। यह नया कानून भारत के एविएशन कानूनी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय केप टाउन कन्वेंशन के अनुरूप बनाता है। इससे एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियों को विमान डी-रजिस्ट्रेशन और एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन जैसी प्रक्रियाओं में तेजी मिलेगी। पहले इन प्रक्रियाओं में लंबा समय लगता था, जिससे एयरलाइंस की लागत बढ़ती थी और इसका असर यात्रियों के हवाई किराए पर पड़ता था।
सरकार ने एविएशन सेक्टर को आर्थिक राहत देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। मंत्री ने बताया कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है। इसके अलावा एयरपोर्ट पर लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में भी 25 प्रतिशत की कटौती की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एयरलाइंस के लिए क्रेडिट सपोर्ट को मजबूत किया गया है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5,000 करोड़ रुपए की ‘क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ को मंजूरी दी है। इससे एयरलाइंस को नकदी संकट से राहत मिलेगी और उनका परिचालन बेहतर हो सकेगा। मंत्री ने दावा किया कि दुनिया में बहुत कम सरकारें एविएशन सेक्टर को इस स्तर का सीधा वित्तीय सहयोग देती हैं।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि जल्द ही लक्षद्वीप में सीप्लेन सेवाएं शुरू की जाएंगी। सरकार अब पारंपरिक विमान सेवाओं के साथ-साथ हेलीकॉप्टर, छोटे रीजनल एयरक्राफ्ट और सीप्लेन के जरिए दूर-दराज क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाने पर फोकस कर रही है। सीप्लेन सेवाओं के शुरू होने से लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय और पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यात्रा आसान और तेज होगी।
नागर विमानन मंत्रालय 40 से 100 सीट वाले छोटे विमानों के लिए भी लीजिंग फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है। इसके अलावा सरकार फ्रैक्शनल ओनरशिप मॉडल और एयरक्राफ्ट को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट के रूप में मान्यता देने जैसे नए नीति विकल्पों पर भी विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एविएशन सेक्टर में निजी निवेश और तेज हो सकता है।
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