नई दिल्लीः केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ से देश की अनेकों कंपनियों को व्यापक स्तर पर कारोबार करने के अवसर मिले हैं। सरकार की नीतियों के कारण रोजगार को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अनुकूल माहौल मिला है। इन सब की वजह से देश ऊर्जा जैसे क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर बन रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत में ऊर्जा क्षेत्र का भविष्य तेजी से आकार ले रहा है। हमारा देश लगातार आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कब भारत की तेल की मांग अपने उच्चतम स्तर पर होगी। ऐसे में हम मौजूदा समय में हर साल 150 अरब डॉलर से ज्यादा के कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं। अगर ग्लोबल ग्रीन हाइड्रोजन प्राइस में गिरावट आती है तो इससे सस्टेनेबल एनर्जी में क्रांति आ सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति आएगी। देश ने ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपमेंट में काफी प्रगति की है और 19 कंपनियों को प्रतिवर्ष 8,62,000 टन (टीपीए) की उत्पादन क्षमता आवंटित की है। 15 फर्मों को 3,000 मेगावाट वार्षिक इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता प्रदान की है। यही नहीं, देश ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्टील, मोबिलिटी और शिपिंग क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट्स भी शुरू किए हैं। भारत ने पहले ही 223 गीगावाट से अधिक की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित कर ली है, जिसमें 108 गीगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता और 51 गीगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता शामिल है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी बाजारों में से एक बन गया है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। सरकार ने 2023 में नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन लॉन्च किया था। इसका मकसद रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बदलाव की गति को बढ़ाना था। इसके लिए शुरुआत में 2.4 अरब डॉलर रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। इसके बाद अन्य कई स्कीम्स की शुरुआत भी हुई है। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हाल ही में देश में ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम शुरू की, जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रमाणित करने और पारदर्शिता के साथ बाजार की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत ढांचा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। देश ऊर्जा के क्षेत्र में जल्द ही आत्मनिर्भर हो जाएगा।
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