सोने-चांदी की चमक फिर रिकॉर्ड स्तर पर, सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा निवेशकों का रुझान

खबर सार :-
वैश्विक ट्रेड वॉर, डॉलर की कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना-चांदी निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना बने हुए हैं। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में भी इन धातुओं में मजबूती बनी रह सकती है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना और चांदी अब भी भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।

सोने-चांदी की चमक फिर रिकॉर्ड स्तर पर, सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा निवेशकों का रुझान
खबर विस्तार : -

Gold Silver rate Today: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोने-चांदी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। बुधवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे सोने-चांदी की मांग तेज हो गई।

एमसीएक्स पर सोना-चांदी नई ऊंचाई पर

कारोबारी सत्र में बुधवार के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,58,339 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 3,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम का नया शिखर छू लिया। खबर लिखे जाने तक सुबह करीब 11:50 बजे सोना 7,363 रुपये यानी 4.89 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,57,928 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। चांदी भी 10,499 रुपये यानी 3.24 प्रतिशत उछलकर 3,34,171 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी रिकॉर्ड तेजी

केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने-चांदी ने नई ऊंचाइयों को छुआ। कॉमेक्स पर सोना 4,849 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमतें 92.5 डॉलर से 95.7 डॉलर प्रति औंस के दायरे में बनी रहीं, जो इसकी मजबूत मांग को दर्शाता है।

अमेरिका-यूरोप ट्रेड वॉर से बढ़ी चिंता

कीमती धातुओं में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और यूरोप (US-EU) के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक, अमेरिका फरवरी से यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में है, जिसे जून तक बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जा सकता है। इसके जवाब में यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका के खिलाफ जवाबी कदम उठाने के संकेत दिए हैं। इस ट्रेड वॉर (Trade War) की आशंका ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी की संभावना और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव ने भी सोने-चांदी को समर्थन दिया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, जापान के बॉन्ड बाजार में बिकवाली और भारतीय रुपये की कमजोरी ने निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया है।

चांदी का भविष्य और भी उज्ज्वल

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के विशेषज्ञ मनोज कुमार जैन का मानना है कि चांदी की मध्यम और लंबी अवधि की तस्वीर बेहद मजबूत है। सप्लाई की कमी और इंडस्ट्रियल डिमांड में तेजी के चलते 2026 तक चांदी की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। एमसीएक्स पर चांदी के लिए 3,30,000 से 3,32,000 रुपये प्रति किलो का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि आने वाले महीनों में यह 3,35,000 से 3,50,000 रुपये प्रति किलो तक जा सकती है।

इंडस्ट्रियल डिमांड भी दे रही मजबूती

सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग ने भी सोने-चांदी की कीमतों को मजबूती दी है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, महंगाई से बचाव की जरूरत और आसान मौद्रिक नीति की उम्मीदें भी कीमती धातुओं को सपोर्ट कर रही हैं।

 

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