नई दिल्लीः भारत की अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही है। इस कारण दुनिया भर के निवेशकों की नजर भारतीय बाजार पर बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निवेश किया जा रहा है, जिसकी वजह से देश में विदेशी मुद्रा का भंडारण भी बढ़ रहा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत होना है। ताजा आंकड़ों के अनुसार हमारा विदेशी मुद्रा भंडार पिछले सात महीनों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है। देश में 9 मई को विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 अरब डॉलर बढ़कर 690.62 अरब डॉलर हो गया है।
आर्थिक विश्लेषक सुनील शाह के मुताबिक तेजी से बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार की वजह देश की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत होना है। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का पूंजीगत बाजारों पर कोई खास प्रभाव नहीं होता है, लेकिन इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत बना हुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार के बढ़ने से भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई को रुपए में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए पर्याप्त मौका भी मिल जाता है। ताजा आंकड़ों पर गौर करें, तो हमारा विदेशी मुद्रा भंडार सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। बीते सात महीने काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। ऐसे में देश के फॉरेक्स रिजर्व का सर्वोच्च स्तर पर पहुंचना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 मई को सप्ताहांत के दौरान 4.5 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी के साथ 690.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से हमारे रुपए को मजबूती मिली है। इसका सबसे बड़ा लाभ भविष्य में यदि कभी राजकोषीय घाटे में और कमी आती है, तो रुपए को मजबूती प्रदान करने में सहारा मिल सकता है। फीलहाल, समीक्षा अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा आस्तियों की वैल्यू 19.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 581.37 अरब डॉलर हो गई है। विदेशी मुद्रा आस्तियों में डॉलर के अलावा येन, पाउंड और यूरो जैसी अन्य मुख्य विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 45 लाख डॉलर बढ़कर 86.33 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार की वैल्यू 2.6 करोड़ डॉलर घटकर 18.53 अरब डॉलर रह गई। समीक्षाधीन सप्ताह में आईएमएफ के साथ भारत की रिजर्व स्थिति भी 13.4 करोड़ डॉलर घटकर अब 4.37 अरब डॉलर रह गई है।
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