मुंबईः देश में डिजिटल इंडिया मुहिम का असर दिखने लगा है। अब स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करना सीख लिया है, जिसकी वजह से लोग स्माल ट्रांजैक्शन से लेकर लॉर्ज ट्रांजैक्शन तक के लिए गूगल पे, फोन पे, पेटीएम, भारत पे, अमेजॉन और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने लगे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के ताजा आंकड़ों पर गौर करें, तो देश में यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में सालाना आधार पर 91.5 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसकी वजह से पेमेंट के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 65.79 करोड़ हो गई है।
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डिजिटल भुगतान के लिए सबसे ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल किया जाता है। देश में हर पांच में चार ट्रांजैक्शन डिजिटल तरीकों यानी यूपीआई के माध्यम से किए जा रहे हैं। देश के डिजिटल पेमेंट्स में यूपीआई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर 79.7 प्रतिशत की हो गई, जो कि वित्त वर्ष 23 में 73.4 प्रतिशत थी। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, यूपीआई क्यूआर कोड में वृद्धि के कारण क्रेडिट कार्ड के माध्यम से होने वाले लेनदेन की वृद्धि दर घटकर 7.94 प्रतिशत तक आ गई है। जहां तक डेबिट कार्ड की बात है, तो उसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत बढ़कर 99 करोड़ तक पहुंच गई है। गूगल पे, पेटीएम और फोनपे जैसे प्लेटफार्मों की बढ़ती पहुंच के कारण यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। बैंक से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यूपीआई नेटवर्क पर लाइव बैंकों की संख्या अप्रैल में 668 दर्ज की गई है। इससे लेनदेन की वैल्यू में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। अप्रैल में यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 17.89 अरब पर पहुंच गई है। साथ ही लेनदेन की वैल्यू सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 23.95 लाख करोड़ रुपए हो गई है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में जुटा आरबीआई
भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की मुहिम शुरू की है, जिसमें ‘हर भुगतान डिजिटल’ अभियान सबसे महत्वपूर्ण है। इस अभियान का उद्देश्य देश में हर व्यक्ति को डिजिटल भुगतान के बारे में जागरूक करना है। इसीलिए आरबीआई की ओर से यूपीआई इन-पर्सन मर्चेंट भुगतान के लिए लेनदेन की सीमा को संशोधित करने में लचीला रुख अपनाया जाता है। ऐसा करने से नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई को यूजर्स की जरूरतों के आधार पर सीमाएं समायोजित करने की अनुमति मिलती है। यही नहीं सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय भी किए गए हैं, जिसकी वजह से भुगतान का तरीका और अधिक सुविधाजनक हो गया है।
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