नई दिल्लीः केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत मुहिम और जन उपयोगी नीतियों का असर उद्योग धंधों से लेकर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक में दिखने लगा है। भारत ऊर्जा के क्षेत्र में सोलर एनर्जी हो या फिर कोयले के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन सभी क्षेत्रों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कोयला मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो अप्रैल में देश में कुल कोयला उत्पादन 81.57 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 78.71 मीट्रिक टन था। यह कोयला उत्पादन में 3.63 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को दर्शाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतर्गत अप्रैल महीने में कैप्टिव व अन्य संस्थाओं की खदानों से होने वाले कोयले का उत्पादन 14.51 मीट्रिक टन रहा है, जो अप्रैल 2024 में दर्ज 11.46 मीट्रिक टन के मुकाबले बहुत बेहतर वृद्धि है।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक कोयला उत्पादान में आया उछाल देश के कुल कोयला उत्पादन में कैप्टिव माइनिंग के बढ़ते योगदान को दर्शाता है। वर्तमान वित्त वर्ष में अप्रैल के दौरान भारत का कुल कोल डिस्पैच 86.64 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो कि पिछले साल अप्रैल में 85.11 मीट्रिक टन था। 30 अप्रैल तक कोयला कंपनियों के पास स्टॉक तेजी से स्टोर हुआ है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 125.76 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 102.41 मीट्रिक टन था। आंकड़ों पर गौर करें, तो अकेले कोल इंडिया लिमिटेड यानी सीआईएल में कुल कोयला स्टॉक वित्त वर्ष 2025-26 में 105 मीट्रिक टन है, जो पिछले वर्ष मौजूद 86.60 मीट्रिक टन से 22.1 प्रतिशत अधिक है। यह उत्पादन में 22.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है, जो कोयला क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और दक्षता को दर्शाता है।
कोयला मंत्रालय निरंतर विकास हासिल करने, कोयले की उपलब्धता में सुधार करने और आयात पर निर्भरता कम करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। घरेलू उत्पादन में लगातार वृद्धि होने के कारण देश का कोयला आयात लगातार कम हो रहा है। यह अप्रैल से दिसंबर 2024 के दौरान 183.42 मिलियन टन रह गया, जो कि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 200.19 मीट्रिक टन से 8.4 प्रतिशत कम हुआ है। मंत्रालय का कहना है कि कोयले के आयात में कमी होने से देश को लगभग 5.43 बिलियन डॉलर यानी 42,315.7 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। बिजली क्षेत्र को छोड़कर गैर-विनियमित क्षेत्रों में अधिक महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जिसमें आयात में सालाना आधार पर 12.01 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, कोयला आधारित बिजली उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में अप्रैल से दिसंबर 2024 तक 3.53 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, लेकिन कोयले के कैलोरी मान को बढ़ाने के लिए थर्मल पावर प्लांट द्वारा ब्लेंडिंग के लिए आयात में 29.8 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार ने घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात कम करने के लिए कॉमर्शियल कोल माइनिंग और मिशन कोकिंग कोल सहित कई नियमों को लागू किया है।
अन्य प्रमुख खबरें
महंगा हुआ हवाई सफर: Air India ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, यात्रियों की जेब पर असर
Wst Asia Cisis के बीच कीमती धातुओं की चमक फीकी: Gold-Silver में गिरावट, निवेशकों में असमंजस
प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत: 5 किलो एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई दोगुनी, सरकार का बड़ा फैसला
वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी दमदार रहेगी Indian Economy, 6.7% GDP Growth का अनुमान
Gold की चमक तेज, Silver ने लगाई छलांग, कीमतें रिकॉर्ड के करीब पहुंचीं
HPCL का बड़ा एक्शन: Zero Tolerance Policy, एलपीजी अनियमितताओं पर 10 डिस्ट्रीब्यूटर सस्पेंड
Good Friday पर थमा बाजार: निवेशकों को मिला ब्रेक, BSE-NSE से लेकर कमोडिटी मार्केट तक सन्नाटा
गिरावट से उभरकर बाजार की शानदार वापसी: Sensex 1,800 अंक चढ़ा, IT शेयरों ने दिखाई ताकत
ई-इनकम टैक्स वेबसाइट: एआई असिस्टेंट 'कर साथी' के साथ टैक्स भरना हुआ आसान
Digital India की रफ्तार तेज: मार्च में UPI ने बनाया 22.64 अरब लेनदेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड