Budget 2026 Income Tax Slab: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश कर रही हैं। इसके साथ ही, वह देश की पहली वित्त मंत्री बन गई हैं जिन्होंने लगातार नौ बजट पेश करके इतिहास रचा है। अपने बजट भाषण के दौरान, वित्त मंत्री ने देश के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों और नीतिगत पहलों पर प्रकाश डाला।
साथ ही टैक्स के मामले में कई बड़े ऐलान किए हैं। हालांकि इनकम टैक्स स्लैब में होगा कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स के मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी है और इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। इनकम टैक्स स्लैब पहले जैसे ही रहेंगे। टैक्सपेयर्स को उसी सिस्टम के तहत टैक्स देना होगा, जैसा पहले था।
Budget 2026 Income Tax Slab: 1 अप्रैल से लागू होगा नया टैक्स सिस्टम
केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सपेयर्स के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, और इनकम टैक्स से जुड़े नियमों को सरल और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई योजना का भी प्रस्ताव किया गया है, जिससे टैक्स कंप्लायंस आसान हो जाएगा।
यूनियन बजट 2025 में नए टैक्स सिस्टम के तहत टैक्स स्लैब में काफी बढ़ोतरी की गई। 4 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया गया, जबकि 30 प्रतिशत की सबसे ज़्यादा दर सिर्फ़ 24 लाख से ज़्यादा की इनकम पर लागू होगी। 2025 के बजट में एक नया इनकम टैक्स बिल पेश करके स्ट्रक्चरल टैक्स सुधार भी किए गए। इसका मकसद भारत के टैक्स कोड को आसान और मॉडर्न बनाना था।
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। इससे लाखों वेतनभोगी और छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का कहना है कि फॉर्म को सरल बनाने के साथ-साथ टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को भी डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। इसके साथ ही नॉन-ऑडिट बिजनेस केस या ट्रस्ट को 31 अगस्त तक का समय देने का प्रस्ताव है।।
बजट 2026 में सरकार ने टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) दरों में बड़ी राहत दी है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर TCS दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो शिक्षा या मेडिकल मकसद से विदेश पैसे भेजते हैं।
इसके अलावा छात्रों, टेक प्रोफेशनल्स और विदेश में रहने वाले NRIs जैसे छोटे टैक्सपेयर्स के लिए 6 महीने की विदेशी संपत्ति खुलासा योजना शुरू की गई है। इससे वे स्वेच्छा से विदेशी संपत्ति या आय का खुलासा कर सकते हैं और बिना किसी कड़ी पेनल्टी के अपने टैक्स मामलों को रेगुलराइज़ कर सकते हैं।
टैक्स नियमों में अस्पष्टता को दूर करने के लिए, सरकार ने साफ किया है कि ह्यूमन रिसोर्स सर्विसेज़ की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्टरों को किए गए पेमेंट को टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) के तहत पेमेंट की कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के तहत, इन सर्विसेज़ पर अब सिर्फ़ 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत का TDS लगेगा, जिससे बिज़नेस और कर्मचारियों दोनों को राहत मिलेगी।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा। उम्मीद है कि इस फैसले से सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को काफी राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इन घोषणाओं से टैक्स सिस्टम पारदर्शी, सरल और कंप्लायंस-फ्रेंडली बनेगा। छोटे टैक्सपेयर्स को काफी राहत मिलेगी, विदेशी एसेट्स की ईमानदार रिपोर्टिंग बढ़ेगी और मुकदमेबाजी कम होगी। इससे मध्यम वर्ग, युवाओं और आम लोगों को फायदा होगा।
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