रेलवे का किफायती प्लानः ट्रेनों में Non-AC कोच की बढ़ोतरी, किराए में 45% सब्सिडी से राहत

खबर सार :-
भारतीय रेलवे किफायती, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नॉन-एसी कोच बढ़ाने और भारी सब्सिडी देने से आम यात्रियों को राहत मिल रही है। साथ ही, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और माल ढुलाई में सुधार से रेलवे की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ी है, जो देश की अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी को मजबूत बनाती है।

रेलवे का किफायती प्लानः ट्रेनों में Non-AC कोच की बढ़ोतरी, किराए में 45% सब्सिडी से राहत
खबर विस्तार : -

 Indian Railways non-AC Coach expansion : आम यात्रियों के लिए सस्ती और सुलभ यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे लगातार बड़े कदम उठा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या में बढ़ोतरी कर यात्रियों को राहत दी जा रही है। इसके साथ ही प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत तक सब्सिडी देकर किराए को नियंत्रित रखा जा रहा है, ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग आसानी से यात्रा कर सकें।

70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास

रेल मंत्रालय के अनुसार, कुल कोचों में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है। यह कदम उस बड़े वर्ग को ध्यान में रखकर उठाया गया है जो किफायती यात्रा को प्राथमिकता देता है। वर्ष 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं, जबकि 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे यात्रियों को सीट उपलब्धता में सुधार और भीड़भाड़ में कमी आने की उम्मीद है।

Indian Railway-Non AC Coach-45% Subsidy

 हर साल 60,000 करोड़ की सब्सिडी

सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी इस योजना का सबसे अहम हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान करता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपये की सहायता दी जाती है, जिससे दैनिक यात्रियों को राहत मिलती है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे न सिर्फ यात्री सेवाओं में सुधार कर रहा है बल्कि माल ढुलाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2013-14 में जहां फ्रेट ट्रैफिक 1,055 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 1,650 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इससे भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है।

तेज विद्युतीकरण और ट्रैक विस्तार

रेलवे के आधुनिकीकरण में विद्युतीकरण बड़ी भूमिका निभा रहा है। अब तक करीब 47,000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है, जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इससे न केवल ईंधन लागत कम हुई है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिली है। ट्रैक निर्माण की गति भी तेज हुई है। पहले जहां लगभग 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 35,000 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इससे नए रूट्स विकसित हो रहे हैं और कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है।

सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा सुधार

सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) की संख्या 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। इसके अलावा, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो चुकी है। रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रैक और ट्रेनों की नियमित मेंटेनेंस, नई तकनीकों का इस्तेमाल और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Railway-Modern Coach OverView

आधुनिक कोच और बढ़ती क्षमता

रेलवे ने एलएचबी कोच (अधिक सुरक्षित और आधुनिक) की संख्या में भी तेजी से वृद्धि की है। हाल के वर्षों में करीब 48,000 नए कोच जोड़े गए हैं। इसके साथ ही लोकोमोटिव की संख्या लगभग 12,000 तक पहुंच गई है, जबकि माल ढुलाई के लिए वैगन की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बढ़ी रफ्तार

सरकार ने नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को मजबूत किया है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के तहत करीब 2,800 किलोमीटर नेटवर्क तैयार हो चुका है, जहां रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं।

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