West Asia conflict impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक हवाई यातायात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई देशों ने अपने एयरस्पेस पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके चलते भारतीय और विदेशी एयरलाइंस को हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। सोमवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय नागर विमानन मंत्री Kinjarapu Ram Mohan Naidu ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय एयरलाइंस की 4,335 से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि विदेशी एयरलाइंस ने भी लगभग 1,187 उड़ानों को रद्द किया है। सरकार का कहना है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम वाले क्षेत्रों में उड़ानें संचालित करना फिलहाल संभव नहीं है।
लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान मंत्री ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष या सुरक्षा संकट के कारण एयरस्पेस बंद हो जाता है, तो वहां उड़ान संचालन पूरी तरह रुक जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एयरलाइंस और सरकार दोनों ही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करती हैं। ऐसे में किसी भी जोखिम वाले एयरस्पेस में विमान भेजना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि यात्रियों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। मंत्री ने कहा कि हालात सामान्य होने तक कई उड़ान मार्गों में बदलाव या रद्दीकरण जारी रह सकता है।
उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने से यात्रियों की यात्रा योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि कई एयरलाइंस ने वैकल्पिक मार्गों और समय में बदलाव के जरिए कुछ उड़ानों को संचालित करने की कोशिश की है। सरकार के अनुसार, तनावपूर्ण हालात के बावजूद करीब 2,19,780 यात्रियों ने इस अवधि के दौरान हवाई यात्रा की। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया वैश्विक विमानन मार्गों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसी क्षेत्र के ऊपर से गुजरती हैं। इसलिए यहां के एयरस्पेस में किसी भी प्रकार का प्रतिबंध वैश्विक विमानन नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।

विश्व में बदलती स्थितियों की गंभीरता को देखते हुए भारत का विमानन नियामक Directorate General of Civil Aviation और Ministry of Civil Aviation लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मंत्री ने बताया कि भारतीय अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों के संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय विमानन एजेंसियों के संपर्क में हैं ताकि सुरक्षा स्थिति और एयरस्पेस की उपलब्धता के बारे में ताजा जानकारी मिलती रहे। सरकार का कहना है कि जैसे ही इन क्षेत्रों का एयरस्पेस दोबारा खुलता है, एयरलाइंस धीरे-धीरे अपनी सेवाएं सामान्य कर सकती हैं। फिलहाल कई मार्गों पर प्रतिबंध या वैकल्पिक रूट लागू हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल और गैस आपूर्ति के प्रमुख मार्गों, खासकर Hormuz Strait जैसे रणनीतिक जलमार्गों पर भी असर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार के भू-राजनीतिक तनाव अक्सर विमानन और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं, क्योंकि एयरस्पेस प्रतिबंध और ईंधन लागत में बढ़ोतरी एक साथ देखने को मिलती है।
इस बीच सरकार ने संसद में यह भी जानकारी दी कि भारत में विमानन क्षेत्र में पायलटों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले सप्ताह नागर विमानन राज्य मंत्री Murlidhar Mohol ने लोकसभा में बताया था कि देश की प्रमुख घरेलू एयरलाइंस में इस समय 11,394 पायलट कार्यरत हैं। इनमें 1,871 महिला पायलट भी शामिल हैं, जो भारतीय विमानन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार करेगा और इसके लिए प्रशिक्षित पायलटों और तकनीकी कर्मचारियों की मांग भी बढ़ेगी।
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