Gold Silver Rate Today: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बहुप्रतीक्षित फैसले से ठीक पहले बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। निवेशक इस समय सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिसके चलते बुलियन मार्केट में दबाव बना हुआ है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कमजोरी का रुझान साफ नजर आया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह 9:46 बजे सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। 2 अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना 0.32 प्रतिशत यानी 485 रुपये की गिरावट के साथ 1,55,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,55,401 रुपये का निचला स्तर और 1,55,788 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ, जो बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
वहीं दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर 5 मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी 0.93 प्रतिशत यानी 2,363 रुपये की कमजोरी के साथ 2,50,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। ट्रेडिंग के दौरान चांदी का न्यूनतम स्तर 2,50,181 रुपये और अधिकतम स्तर 2,51,639 रुपये दर्ज किया गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बुलियन की कीमतों में गिरावट का रुख जारी है। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 0.27 प्रतिशत गिरकर 5,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे 4,994 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। वहीं, चांदी की कीमतों में और ज्यादा कमजोरी देखी गई और यह 1.45 प्रतिशत गिरकर 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे 78.745 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी।
बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के फैसले से पहले की अनिश्चितता के कारण है। 17 मार्च से शुरू हुई इस दो दिवसीय बैठक का निष्कर्ष 18 मार्च को सामने आएगा। निवेशकों की नजरें खास तौर पर ब्याज दरों पर फेड के रुख और उसके भविष्य के संकेतों पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फेड सख्त रुख अपनाता है या ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेत देता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर और दबाव आ सकता है। इसके विपरीत, यदि फेड नरम रुख दिखाता है, तो बुलियन में तेजी लौट सकती है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। खासतौर पर ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। पिछले एक महीने में तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया है। महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच फेड का फैसला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसका असर न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ेगा। इसी कारण बुलियन निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं और बाजार में सीमित गतिविधि देखी जा रही है।
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