India Global Trade Export growth: पीयूष गोयल ने मंगलवार को लोकसभा में भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भारत का ग्लोबल ट्रेड फुटप्रिंट उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है, जिससे निर्यातकों के लिए 38 विकसित देशों के बाजार खुल गए हैं। यह बदलाव भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
गोयल ने बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखा है। उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों का असर देश के व्यापारिक आंकड़ों पर पड़ सकता है, लेकिन सरकार ने इन प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। इससे भारत की आर्थिक स्थिरता और नीति-निर्माण क्षमता का भी संकेत मिलता है।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की निर्यात कहानी को केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्विस सेक्टर में भारत की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। पिछले तीन-चार वर्षों में सर्विस निर्यात में निरंतर वृद्धि हुई है, जो वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव के बीच देश को स्थिरता प्रदान कर रही है। आईटी, कंसल्टिंग और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका इसका उदाहरण है।

गोयल ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को भारत की इस सफलता का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने जिन देशों के साथ एफटीए किए हैं, उनके जरिए 38 विकसित देशों के बाजार निर्यातकों के लिए खुले हैं। इन देशों की प्रति व्यक्ति आय अधिक होने के कारण वहां भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग भी ज्यादा है। इसके अलावा, लागत के मामले में ये देश भारत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि जैसे ही ये एफटीए पूरी तरह लागू होंगे, विशेष रूप से यूके के साथ हुआ समझौता, निर्यातकों के लिए नए अवसरों की बाढ़ आ जाएगी। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
गोयल ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था का व्यापक आधार मजबूत बना हुआ है। रिकॉर्ड स्तर पर एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का आना और दुनिया भर के देशों का भारत के साथ व्यापारिक साझेदारी बढ़ाने में रुचि दिखाना इस बात का प्रमाण है। भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद वैश्विक व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। इस पूरे परिदृश्य में भारत की रणनीति स्पष्ट है—वैश्विक बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाना, निर्यात को विविध बनाना और सेवा क्षेत्र की ताकत का लाभ उठाना। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक व्यापार में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।
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