Gold Silver Rate today: केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले कीमती धातुओं के बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। पिछले दो दिनों से जारी गिरावट रविवार को और गहरी हो गई, जब चांदी की कीमतों में करीब 9 से 10 प्रतिशत तक की तेज फिसलन दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में धातुओं की बिकवाली का सीधा असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर पड़ा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विशेष सत्र के दौरान रविवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी में 22,626 रुपये यानी लगभग 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसके बाद चांदी 2,69,299 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। शुरुआती कारोबार में यह और टूटकर 2,65,652 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जहां करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रिकॉर्ड ऊंचाई से तुलना करें तो अब तक चांदी लगभग 36 प्रतिशत सस्ती हो चुकी है।
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी जोरदार गिरावट देखने को मिली। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 3.59 प्रतिशत यानी 5,368 रुपये टूटकर 1,44,285 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इंट्रा-डे कारोबार के दौरान सोने का भाव 1,36,185 रुपये प्रति 10 ग्राम तक लुढ़क गया। यह गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही, क्योंकि हाल के महीनों में सोना सुरक्षित निवेश के रूप में तेजी से चढ़ा था।
कीमती धातुओं में आई इस तेज गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका से जुड़ी मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि केविन वार्श, जेरोम पॉवेल की जगह फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन बन सकते हैं। केविन वार्श को सख्त यानी ‘हॉकिश’ सोच वाला माना जाता है, जो ब्याज दरों पर कड़ा रुख अपना सकते हैं। इस संभावना से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है।

आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है। निवेशक डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे धातुओं की मांग घटती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बाद भारतीय बाजार में भी सोना-चांदी तेजी से टूटे।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे मुनाफावसूली भी बड़ी वजह है। हाल के महीनों में शेयर बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों ने बड़ी मात्रा में सोना-चांदी खरीदी थी, जिससे इनके दाम बहुत तेजी से बढ़े। अब कीमतें अपनी वास्तविक मजबूती से काफी ऊपर चली गई थीं, इसलिए निवेशक मुनाफा निकाल रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। मजबूत डॉलर, ब्याज दरों की अनिश्चितता और वैश्विक संकेतों के चलते फिलहाल कीमती धातुओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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