यूएन की चेतावनी: वैश्विक फंडिंग में भारी गिरावट से बढ़ा दुनिया भर में एचआईवी महामारी फैलने का खतरा

खबर सार :-

यूएन की एचआईवी-एड्स से लड़ने वाली एजेंसी यूएनएड्स ने रिपोर्ट जारी की है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए मिलने वाली वैश्विक फंडिंग में भारी गिरावट आई है। वैश्विक फंडिंग में गिरावट से दुनिया भर में एचआईवी महामारी फैलने का खतरा अधिक बढ़ गया है। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एचआईवी की रोकथाम के लिए ग्लोबल फंडिंग में 18 प्रतिशत की कमी आई है।
यूएन की चेतावनी: वैश्विक फंडिंग में भारी गिरावट से बढ़ा दुनिया भर में एचआईवी महामारी फैलने का खतरा

खबर विस्तार : -

ब्रासीलिया/जिनेवा: वैश्विक फंडिंग में भारी गिरावट से दुनिया भर में एचआईवी महामारी के फैलने का खतरा बढ़ गया है। यूनाइटेड नेशंस की एचआईवी-एड्स से लड़ने वाली एजेंसी यूएनएड्स ने यह रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यूएनएड्स एजेंसी की यह रिपोर्ट जहां डरावनी भी है तो वहीं दुनिया को इस बीमारी से संभलने की चेतावनी भी देती है। एजेंसी के मुताबिक, आर्थिक सहयोग में बड़ी गिरावट से दुनिया में एचआईवी महामारी के फैलने का खतरा अधिक बढ़ गया है।

यूएनएड्स एजेंसी की जारी 60 पन्नों की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि अगर तत्काल वैश्विक प्रतिबद्धता और सहयोग नहीं बढ़ाया गया तो बीते कई सालों में हासिल की गई उपलब्धियों पर पानी फिरना तय है। एजेंसी की रिपोर्ट अनुसार, वर्ष 2025 में एचआईवी की रोकथाम के लिए ग्लोबल फंडिंग 18 प्रतिशत घटकर 7.3 अरब डॉलर रह गई। यह वित्तीय सहायता बीते 20 वर्षों में सबसे कम है। इससे नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों में आई कमी का रुझान पलट सकता है।

वैश्विक एचआईवी फंडिंग का 75 प्रतिशत योगदान देता था अमेरिका 

यूएनएड्स ने बताया कि जनवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका ने एचआईवी से जुड़े सभी कार्यक्रमों की फंडिंग पर अस्थायी रोक लगा दी थी। हालांकि कुछ दिनों बाद जीवनरक्षक उपचार संबंधी वित्तीय सहायता बहाल कर दी गई, लेकिन अधिकांश प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग को सीमित कर दिया गया। इससे पहले अमेरिका वैश्विक एचआईवी फंडिंग का लगभग 75 प्रतिशत योगदान देता था।

पटरी से उतरता दिख रहा 2030 तक एड्स को समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय राजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जिससे एचआईवी के खिलाफ दशकों की मेहनत से मिली सफलताएं जोखिम में हैं। एजेंसी ने दोहराया कि वर्ष 2030 तक एड्स को समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य फिलहाल पटरी से उतरता दिखाई दे रहा है। फंडिंग में कमी के अलावा इबोला जैसी स्वास्थ्य आपदाओं ने भी इस दिशा में प्रयासों को प्रभावित किया है। पिछले वर्ष दुनिया भर में लगभग 12 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हुए।

एचआईवी रोकथाम, जांच, समुदाय आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा फंडिंग का असर 

हालांकि कुछ देशों ने घरेलू स्तर पर स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर विदेशी सहायता में कमी की आंशिक भरपाई की, फिर भी कुल एचआईवी संसाधनों में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लेकिन सभी देशों के लिए ऐसा करना संभव नहीं था। विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका, जहां वैश्विक स्तर पर लगभग आधे नए संक्रमण दर्ज होते हैं। कैमरून, नाइजीरिया और जाम्बिया के राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए दी जाने वाली प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीआरईपी) दवा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। यूएनएड्स ने कहा कि फंडिंग में आई बाधाओं का सबसे अधिक असर एचआईवी रोकथाम, जांच और समुदाय आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है, जो संक्रमण के सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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