Bilaspur Flood: रिकाॅर्डतोड़ बारिश से बढ़ीं मुश्किलें, घरों में भरा पानी, बुजुर्ग की मौत, 7 ट्रेनें रद्द
खबर सार :-
Bilaspur Flood: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रिकाॅर्डतोड़ बारिश से मुश्किलें बढ़ गई हैं। बंधवापारा, लिंक रोड, पुराना बस स्टैंड, तालापारा और यदुनंदन काॅलोनी में पानी भर गया। हाईवे पर जलभराव का असर यातायात पर भी पड़ा।
खबर विस्तार : -
बिलासपुर: 24 घंटे में रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने छत्तीसगढ़ के पूरे बिलासपुर शहर को डुबो दिया। तेज बहाव में बह जाने से एक बुज़ुर्ग महिला की जान चली गई, जबकि सैकड़ों परिवार अपने घरों में फंस गए।
हालात इतने गंभीर हो गए कि SDRF को लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रिहायशी कॉलोनियों में नावें लगानी पड़ीं। सड़कें, रेलवे ट्रैक, मोहल्ले और बाजार डूब गए; बिजली और पानी की सप्लाई सिस्टम ठप हो गए; और करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
छह से आठ फीट तक बढ़ा पानी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने शुक्रवार तक शहर का नजारा पूरी तरह बदल दिया। शहर के कई हिस्सों में पानी का लेवल छह से आठ फीट तक बढ़ गया। जिन इलाकों में पिछले दो दशकों में कभी पानी जमा नहीं हुआ था, वहां भी लोगों के घरों में पानी घुस गया। परिवारों ने रात अपने घरों को बचाने की कोशिश करने के बजाय अपना सामान बचाने में बिताई।
कई घरों में घुसा बाढ़ का पानी
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में देवनंदन नगर फेज 1 और 2, गीतांजलि सिटी, फ्रेंड्स कॉलोनी, गुरु विहार, वसंत विहार, सरोज विहार, जोरापारा, जबड़ापारा, अरपापार, रायपुर रोड, सकरी और शहर की बाहरी कॉलोनियां शामिल थीं। कई घरों में घर का सामान जैसे रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कूलर और सोफे पूरी तरह डूब गए। लोगों को ग्राउंड फ्लोर छोड़कर ऊपरी मंजिलों पर शरण लेनी पड़ी।
तेज बहाव में वृद्धा की मौत
सबसे दुखद घटना लिंगियाडीह की रहने वाली 65 साल की प्रमिला बाई के साथ हुई। वह शुक्रवार सुबह काम के लिए निकली थीं, तभी शीला अपार्टमेंट के पास उफनते नाले को पार करने की कोशिश में वह तेज बहाव में बह गईं। कुछ घंटों बाद उनकी बॉडी राजकिशोर नगर में ऊर्जा पार्क के पास अरपा नदी के किनारे झाड़ियों में मिली। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जरूरी जांच के बाद बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच से पता चलता है कि वह फिसल गई और बाद में तेज बहाव में फंस गई।
204 लोगों को सुरक्षित निकाला
बहुत ज्यादा पानी भरने की वजह से कई कॉलोनियों में रहने वाले लोग घंटों तक अपने घरों में फंसे रहे। हालात बिगड़ने पर, SDRF टीम को नावों का इस्तेमाल करके राहत और बचाव का काम करना पड़ा। देवनंदन नगर, बंधवापारा, जगदंबा कॉलोनी, गीतांजलि सिटी, विजयपुरम और चौबे कॉलोनी जैसे इलाकों से कुल 204 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। बचाव के काम के दौरान एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर दिया गया और बढ़ते पानी में फंसी एक बुज़ुर्ग महिला को सफलतापूर्वक बचाया गया।
कई हिस्सों में बिजली सप्लाई बंद
बारिश रुकने के बाद भी लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं; पूरा दिन घरों से पानी निकालने, कीचड़ हटाने और खराब सामान को ठीक करने में बीता। कई कॉलोनियों में शुक्रवार देर रात तक भी पानी कम नहीं हुआ था। शिवम होम्स, चौबे कॉलोनी और बंधवापारा जैसे इलाकों में रहने वालों को दूसरी रात भी अपने घरों की ऊपरी मंजिलों पर बिताने को मजबूर होना पड़ा। लगातार पानी भरने की वजह से, एहतियात के तौर पर शहर के कई हिस्सों में बिजली सप्लाई काट दी गई। इससे पीने के पानी की सप्लाई में रुकावट आई, जिससे लोगों को बोतल वाले पानी पर निर्भर रहना पड़ा। बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
ड्रेनेज मैनेजमेंट पर उठे गंभीर सवाल
बारिश ने नगर निगम के ड्रेनेज मैनेजमेंट पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले तीन सालों में पानी भरने से रोकने के लिए बड़े नाले बनाने पर लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद, बंधवापारा, लिंक रोड, पुराना बस स्टैंड, तालापारा और यदुनंदन कॉलोनी जैसे इलाके जलमग्न हो गए। कुछ जगहों पर अधूरे नाले होने से दिक्कतें हुईं, जबकि दूसरी जगहों पर पुराने, पतले नाले और ओवरलोडेड ड्रेनेज सिस्टम की वजह से पानी निकल नहीं पाया।
हाईवे समेत रेलवे स्टेशनों पर भरा पानी
भारी बारिश का असर शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर भी पड़ा। बिलासपुर-कोरबा और बिलासपुर-रायगढ़ रूट समेत कई नेशनल और स्टेट हाईवे पर पानी भर जाने से ट्रैफिक में रुकावट आई। कुटीघाट पर लीलागर नदी के पुल के ऊपर तीन से चार फीट गहरा पानी बह रहा था, जिससे सारा आना-जाना पूरी तरह रुक गया। रेलवे यार्ड और स्टेशन परिसर में ट्रैक पानी में डूब जाने से रेल सर्विस पर भी असर पड़ा। सात ट्रेनें कैंसिल करनी पड़ीं, जबकि चार दूसरी ट्रेनों के रूट और ऑपरेशन में बदलाव किया गया।
पीड़ित परिवारों को 1,700 खाने के पैकेट बांटे
हालात बिगड़ने पर जिला प्रशासन, नगर निगम, SDRF और पुलिस ने मिलकर राहत अभियान चलाया। JCB, पंपिंग मशीन और जेट सक्शन मशीन का इस्तेमाल करके प्रभावित इलाकों से पानी निकाला गया। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने के लिए नाव और ट्रैक्टर लगाए गए। नगर निगम ने उन परिवारों को लगभग 1,700 खाने के पैकेट बांटे जो घर पर खाना नहीं बना पा रहे थे। राहत कैंप लगाए गए।
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