लखनऊ : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी की अध्यक्षता में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण सुधारों पर सहमति बनी। इन सुधारों का उद्देश्य उद्योगों को सरल, सुरक्षित और किफायती वातावरण प्रदान करना है, ताकि राज्य में निवेश को नई गति मिल सके।
बैठक में सबसे अहम निर्णय यह रहा कि अब पूरे प्रदेश में भूखण्ड आवंटन की प्रक्रिया एक समान नीति से चलेगी। अलग-अलग औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में प्रचलित विभिन्न नियमों को समाप्त कर उद्यमियों के लिए नीति को पारदर्शी और सरल बनाया जाएगा। इसके साथ ही यह भी तय हुआ कि उद्योगों के लिए भूमि अब नीलामी के बजाय लॉटरी प्रणाली से आवंटित की जाएगी, ताकि छोटे उद्योगों, स्टार्टअप और स्थानीय इकाइयों को समान अवसर मिल सके। मंत्री नन्दी ने स्पष्ट रूप से कहा कि औद्योगिक भूखण्ड केवल उद्योग स्थापना के लिए दिया जाएगा और उसका हस्तांतरण पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई उद्यमी भूमि का दुरुपयोग करता पाया जाता है, तो उसका आवंटन स्वतः निरस्त करने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
उद्योगों के व्यवस्थित विकास के लिए क्लस्टर मॉडल को बढ़ावा देने की भी सहमति बनी। यानी एक ही तरह के उत्पाद बनाने वाले उद्योगों को एक ही औद्योगिक क्षेत्र में बसाया जाएगा, ताकि वे सस्ती लागत, साझा सुविधाओं और बेहतर सप्लाई चेन का लाभ उठा सकें। नए उद्योगों को तुरंत काम शुरू करने में मदद देने के लिए राज्य सरकार प्लग एंड प्ले मॉडल को मजबूत करेगी। इसके तहत छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को किफायती किस्तों पर तैयार शेड उपलब्ध कराए जाएंगे। औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार भी बड़े स्तर पर किया जाएगा, फायर स्टेशन, विद्युत उपकेंद्र, पुलिस चौकी, सामुदायिक केंद्र, कैंटीन और डिस्पेंसरी जैसी आवश्यक सेवाओं को अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाएगा।
लीज रेंट और भूमि मूल्य को उद्योगों के अनुकूल बनाने पर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी। सरकारी भूमि पर केवल विकास व्यय लेने और निजी भूमि पर कम से कम 25 प्रतिशत की छूट देने का सुझाव प्रस्तुत किया गया। वही, जिन उद्योगों की इकाइयाँ किराए पर चल रही हैं या विस्तार चाहती हैं, उन्हें भूमि आवंटन में प्राथमिकता देने की व्यवस्था बनेगी। स्टार्टअप और एमएसएमई को विशेष वरीयता देने पर भी जोर रहा। इसके अलावा, उद्यमियों की समस्याओं और आवेदनों की ऑनलाइन स्टेटस ट्रैकिंग सुविधा विकसित करने का निर्णय भी बैठक में सामने आया। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री राकेश सचान, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार, सचिव प्रांजल यादव, सीईओ इन्वेस्ट यूपी विजय किरण आनंद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से उत्तर प्रदेश देश का सबसे आकर्षक, औद्योगिक और निवेश-अनुकूल राज्य बनकर उभरेगा।
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